उत्तराखंड में एक युवक ने पारिवारिक दबाव और प्रेमिका से संपर्क की कमी के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर ली. जब परिजनों को युवक की मौत का पता चला, तो वे शोक के सागर में डूब गए, लेकिन उसने कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की और शव का अंतिम संस्कार बिना कानूनी प्रक्रिया के कर दिया.
प्रेम संबंध और परिवार की रोक-टोक
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के मंडी धनौरा क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाला युवक उत्तराखंड में एक निजी नौकरी करता था. उसकी एक युवती से प्रेम संबंध थे, जो उसके ही क्षेत्र के दूसरे गांव में रहती थी. दोनों फोन पर अक्सर बातें किया करते थे, लेकिन जैसे ही युवती के परिवार को इसकी जानकारी हुई, उन्होंने अपनी बेटी को फोन लेने से मना कर दिया और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी.
संचार की कमी और मानसिक दबाव
प्रेमिका से संपर्क टूटने के कारण युवक काफी परेशान हो गया. उसे यह चिंता सता रही थी कि अगर वह अपनी प्रेमिका से फिर से संपर्क नहीं कर पाया तो उसकी मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है. यह मानसिक दबाव युवक के लिए असहनीय हो गया. युवती पर परिजनों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की जानकारी उसे किसी अन्य माध्यम से मिली, और उसके दिल में यह डर घर कर गया कि शायद वह अपनी प्रेमिका से कभी नहीं मिल पाएगा.
आत्महत्या का दुखद कदम
इस तनाव और डर से आहत होकर युवक ने उत्तराखंड में अपने कमरे में फांसी का फंदा लगा लिया और आत्महत्या कर ली. परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो वे पूरी तरह से टूट गए और रोते-रोते अपने प्रियजन को खोने का दुख सहन नहीं कर पाए. हालांकि, इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि परिवार ने शव का अंतिम संस्कार बिना पुलिस कार्रवाई के कर दिया. इस घटना के बारे में जब पुलिस से पूछा गया, तो प्रभारी निरीक्षक अमरपाल सिंह ने कहा कि उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिली.
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