Akash Anand returns to BSP: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सियासत में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में एक बार फिर जगह देकर यह साफ कर दिया है कि बीएसपी में अभी भी परिवार के पुराने पत्ते पूरी तरह फेंके नहीं गए हैं, बल्कि रणनीति के हिसाब से उन्हें दोबारा खेलने की तैयारी है.
सिर्फ सात हफ्ते पहले ही अनुशासनहीनता और परिवारिक हस्तक्षेप के आरोपों में पार्टी से बाहर किए गए आकाश की ये तीसरी वापसी है लेकिन इस बार कई शर्तों और सीमाओं के साथ रीएंट्री हुई है. उन्हें फिर से राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया है और पार्टी के राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी गई है, यानी बीएसपी में एक बार फिर वे नंबर दो की भूमिका में लौट आए हैं.
सियासी गलियारों में बुआ-भतीजे की जोड़ी
आकाश आनंद की वापसी ने एक बार फिर मायावती के उत्तराधिकारी को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है. क्या मायावती अपने पुराने बयान से पीछे हट रही हैं जिसमें उन्होंने साफ किया था कि अब उनके जीवनकाल में कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएसपी की बदलती राजनीतिक जमीन और युवा नेतृत्व की आवश्यकता ने शायद मायावती को इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है.
उतार-चढ़ाव भरा रहा आकाश का सफर
आकाश आनंद को पहली बार 2019 में राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था. पार्टी में उन्हें मायावती के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाने लगा था. लेकिन 2024 में सीतापुर के एक विवादित भाषण के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और फिर पार्टी ने उन्हें पद से हटा दिया. मार्च 2025 में मायावती ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया था. साथ ही, आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी में गुटबाजी फैलाने और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगाए थे.
13 अप्रैल की माफी और वापसी का रास्ता
डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर आकाश आनंद ने एक्स पर एक भावुक माफीनामा जारी किया, जिसमें उन्होंने यह स्वीकारा कि वे अब अपने रिश्तेदारों—खासतौर पर ससुराल पक्ष—को पार्टी के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने देंगे. माफीनामे के महज 7 घंटे बाद, मायावती ने उनकी माफी को स्वीकार करते हुए उन्हें पार्टी में दोबारा जगह दी. सूत्रों के मुताबिक, आकाश की वापसी की राह उनके पिता और बीएसपी उपाध्यक्ष आनंद कुमार की पहल और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थन से आसान हुई.
शर्तों के साथ नई शुरुआत
हालांकि वापसी के साथ ही आकाश को कड़ा अनुशासन भी दिया गया है. मायावती ने साफ किया कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी में शामिल किए जाने का सवाल ही नहीं उठता. आकाश को निर्देश दिए गए हैं कि वे वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करें और ससुराल पक्ष के प्रभाव से पूरी तरह दूरी बनाए रखें.
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