तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी को आखिरकार भारत आने की इजाजत मिल गई है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी के बाद अब वह 9 अक्टूबर को भारत यात्रा पर पहुंचेंगे. इस दौरान उनके भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है. पहले यह दौरा अगस्त में तय हुआ था, लेकिन UNSC की अनुमति न मिलने के कारण इसे टालना पड़ा था. हालांकि भारत तब भी इस दौरे को लेकर सकारात्मक रुख दिखा चुका था.
अमीर खान मुत्ताकी पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है. ऐसे में वह बिना मंजूरी किसी भी देश की यात्रा नहीं कर सकते. संयुक्त राष्ट्र की 1988 प्रतिबंध समिति के अंतर्गत यह प्रतिबंध लगाया गया था, जो खासतौर पर तालिबान और उससे जुड़े व्यक्तियों और संगठनों पर नजर रखती है. इस प्रतिबंध के चलते मुत्ताकी को भारत यात्रा के लिए विशेष अनुमति की जरूरत थी, जो अब मिल चुकी है.
प्रतिबंधों में छूट कैसे मिलती है?
संयुक्त राष्ट्र की 1988 प्रतिबंध समिति कुछ शर्तों और औपचारिकताओं के तहत किसी प्रतिबंधित व्यक्ति को सीमित समय और उद्देश्य के लिए यात्रा की अनुमति दे सकती है. इस प्रक्रिया में संबंधित देश समिति से छूट की मांग करता है, जिसे सभी सदस्यों की सहमति से स्वीकृति मिलती है. इस बार भारत की ओर से मुत्ताकी की यात्रा के लिए पूरी तैयारी पहले से की गई थी, जिससे पाकिस्तान को अपनी आपत्ति दर्ज कराने का कोई मौका नहीं मिला.
पाकिस्तान की चालें हुईं नाकाम
पाकिस्तान लगातार इस कोशिश में था कि अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा को किसी भी तरह रोका जाए. पिछली बार भी जब मुत्ताकी भारत आने वाले थे, तो पाकिस्तान की आपत्ति के चलते UNSC से मंजूरी नहीं मिल पाई थी और दौरा रद्द करना पड़ा था. लेकिन इस बार भारत ने कूटनीतिक रूप से ऐसी स्थिति बनाई कि पाकिस्तान चाहकर भी इसमें रोड़ा नहीं अटका सका.
क्यों चिढ़ता है पाकिस्तान भारत-तालिबान रिश्तों से?
तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद पाकिस्तान ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत माना था और भारत को नुकसान में देखने की कोशिश की थी. लेकिन हालात ने करवट ली, और तालिबान ने पाकिस्तान की मंशा को पहचान लिया. आए दिन अफगानिस्तान में तालिबान और पाकिस्तान के बीच तनातनी की खबरें आती रहती हैं. तालिबान अब पाकिस्तान की बजाय भारत जैसे स्थिर और विकासोन्मुख देशों से संबंध मजबूत करना चाहता है, ताकि अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर समर्थन मिल सके.
भारत की रणनीति
भारत हमेशा से अफगानिस्तान में स्थिरता और शांति का समर्थक रहा है. भले ही भारत ने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी हो, लेकिन मानवीय और कूटनीतिक आधार पर संवाद के दरवाजे कभी बंद नहीं किए. अमीर खान मुत्ताकी की यह यात्रा भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जहां दोनों पक्षों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं.
यह भी पढ़ें: म्यूनिख एयरपोर्ट बंद, फ्लाइट्स डायवर्ट... जर्मनी में 17 ड्रोन ने मचाया आतंक, क्या रूस ने किया हमला?