संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कानून के शासन को लेकर पाकिस्तान की टिप्पणियों पर कड़ा जवाब दिया है. भारत ने कहा कि जिस देश में सेना का शासन पर इतना प्रभाव हो कि वही कानून लागू करने का तरीका तय करे, उसे दूसरे देशों को कानून का पाठ नहीं पढ़ाना चाहिए.
यह मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में ‘राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन’ विषय पर हुई चर्चा से जुड़ा है. 9 अक्टूबर को पाकिस्तान की टिप्पणियों के बाद भारत ने जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया.
सेना का पाकिस्तान की कानूनव्यवस्था पर प्रभाव
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि यह हैरानी की बात है कि जिस देश का अपना रिकॉर्ड कानून के शासन पर सवाल खड़े करता है, वह दूसरों को इस मुद्दे पर उपदेश दे रहा है.
मैथिली ने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में कानून के शासन की रक्षा करने की बात करता है, लेकिन उसके अपने देश में सेना का कानून व्यवस्था पर गहरा प्रभाव है. उन्होंने कहा कि जो देश अपने सैन्य शासकों को अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखता है, उसे इस समिति में कानून के शासन पर उपदेश देने का अधिकार नहीं है.
भारत ने पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में रखे जाने का मुद्दा भी उठाया. मैथिली ने कहा कि पाकिस्तान में किसी भी सरकार को अपना निर्वाचित कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया है. उन्होंने इमरान खान को जेल में रखे जाने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद उन्हें चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून के शासन का मजाक उड़ाने जैसा है.