Halloween Pumpkin Story: सनातन धर्म में कद्दू का खास महत्व माना जाता है. कहीं इसे रामायण काल से जोड़कर सीताफल कहा गया है तो कहीं आध्यात्मिक महत्व के कारण इसे काशीफल के नाम से जाना जाता है. वहीं, मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्माण्डा से भी कद्दू का खास संबंध बताया जाता है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि विदेशों में मनाए जाने वाले हैलोवीन त्योहार में कद्दू का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? इस दिन कद्दू को खोखला करके उस पर डरावना चेहरा बनाया जाता है, जिसे 'जैक-ओ-लैनटर्न' कहा जाता है. आखिर इसके पीछे क्या मान्यता है और कद्दू का हैलोवीन से क्या कनेक्शन है? आइए जानते हैं.
हैलोवीन फेस्टिवल क्यों मनाते हैं?
हैलोवीन हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है. यह पश्चिमी देशों, खासकर ब्रिटेन और आयरलैंड में काफी लोकप्रिय है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत करीब 2000 साल पहले प्राचीन सेल्टिक लोगों के 'सौवेन' त्योहार से हुई थी.
मान्यता है कि इस दिन जीवित और मृत लोगों की दुनिया के बीच की सीमा काफी कमजोर हो जाती है. इसी वजह से मृत लोगों की आत्माओं के धरती पर आने की बात कही जाती है. समय के साथ इस त्योहार से कई तरह की परंपराएं जुड़ती गईं.
कद्दू पर 'जैक-ओ-लैनटर्न' बनाना परंपरा का हिस्सा
आयरिश संस्कृति में 'जैक-ओ-लैनटर्न' से जुड़ी एक पुरानी कहानी भी प्रचलित है. कहानी के मुताबिक, स्टिंजी जैक नाम का एक लालची व्यक्ति था. एक बार उसने शराब के पैसे देने से बचने के लिए शैतान को अपने साथ शराब पीने के लिए बुलाया.
जैक ने चालाकी से शैतान को सिक्के में बदलने के लिए राजी कर लिया. जैसे ही शैतान सिक्के में बदला, जैक ने उसे अपनी जेब में रख लिया. इसके बाद उसने शैतान को आजाद करने के बदले शर्त रखी कि वह एक साल तक उसे परेशान नहीं करेगा और उसकी मौत के बाद उसकी आत्मा को अपने साथ नहीं ले जाएगा.
कुछ समय बाद जैक की मौत हो गई. लेकिन उसे न तो स्वर्ग में जगह मिली और न ही नरक में जाने दिया गया. शैतान ने अपना वादा निभाया. इसके बाद जैक को हमेशा भटकने की सजा मिली.
कद्दू से हैलोवीन का क्या है कनेक्शन?
शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले हैलोवीन पर कद्दू नहीं, बल्कि शलजम से डरावने चेहरे बनाए जाते थे. मान्यता है कि स्वर्ग और नरक दोनों जगह से ठुकराए जाने के बाद जैक हाथ में जलता हुआ कोयला लेकर भटकता था.
रास्ता देखने के लिए उसने एक शलजम को अंदर से खोखला किया और उसमें जलता हुआ कोयला रख लिया. इसके बाद आयरलैंड में लोग शलजम को खोखला करके उस पर डरावने चेहरे बनाने लगे. माना जाता था कि इससे बुरी आत्माओं को दूर रखा जा सकता है.
बाद में जब आयरिश लोग अमेरिका पहुंचे, तो वहां उन्हें बड़ी मात्रा में कद्दू मिला. कद्दू शलजम की तुलना में बड़ा और आसानी से खोखला किया जा सकता था. इसके बाद शलजम की जगह कद्दू का इस्तेमाल 'जैक-ओ-लैनटर्न' बनाने के लिए होने लगा और धीरे-धीरे यह हैलोवीन की पहचान बन गया.
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