नई दिल्ली, भारत 24 डिजिटल डेस्क: पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दलील दी है कि पिछड़े वर्गों में सबसे पिछड़े समुदायों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए. ऐसे में मंगलवार को नुसूचित जाति के आरक्षण को लेकर चली बहस ने दिलचस्प मोड़ ले लिया. दलित समुदाय से ही आने वाले जस्टिस बीआर गवई ने ही इसे लेकर गंभीर सवाल पूछ लिए.
अगड़ी और पिछड़ी जाति को लेकर बोले AG
पंजाब के AG ने कहा कि एग्जाम में 99% स्कोर करने वाले अगड़ी जाति के व्यक्ति पर 56% नंबर लाने वाले पिछड़ी जाति के व्यक्ति को तरजीह दी जानी चाहिए. क्योंकि अगड़ी जाति वाले के पास सब सुविधाएं थीं जबकि पिछड़ी जाति वाला मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रहा. उन्होंने कहा कि 'अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किसी समुदाय को आरक्षण के लिए पात्र लोगों की सूची से हटाया जा सकता है, अगर उसने सरकारी नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त करके सामाजिक क्षेत्र में पर्याप्त प्रगति हासिल कर ली हो.'
IAS और IPS के बच्चों को आरक्षण?
पंजाब के AG को जवाब देते हुए जस्टिस गवई, जो खुद दलित हैं और अगले साल सीजेआई बनने वाले हैं, उन्होंने पूछ लिया- 'SC/ST समुदाय से कोई व्यक्ति आईएएस-आईपीएस जैसी केंद्रीय सेवाओं में पहुंचे तो उसे सबसे अच्छी सुविधाएं मिलती हैं. फिर भी उसके बच्चे और उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ मिलता रहता है. क्या यह जारी रहना चाहिए? जस्टिस गवई का सवाल इस बात को उठाता है कि क्या उन लोगों के बच्चों को भी आरक्षण मिलना चाहिए जो पहले से ही अच्छी स्थिति में हैं.