Nana Patekar Funeral: जिस अभिनेता की आवाज और संवाद अदायगी ने दशकों तक पर्दे पर अलग पहचान बनाई, आज उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर पंचतत्व में विलीन हो गए. उनका अंतिम संस्कार पुणे के डोंजे स्थित फार्महाउस में राजकीय सम्मान के साथ किया गया. उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं. पत्नी-बेटे ने मुखाग्नि दी. परिवार, करीबी दोस्तों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी. महाराष्ट्र सरकार ने मराठी रंगमंच के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए राजकीय सम्मान देने का फैसला किया था.
गोवा में ली आखिरी सांस, बेटे ने की खबर की पुष्टि
नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर निधन हुआ. वह 75 वर्ष के थे. अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका. अस्पताल में सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया. उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की. नाना की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार उनके पुणे वाले फार्महाउस में हो और उनकी इसी इच्छा के मुताबिक उन्हें डोंजे में अंतिम विदाई दी गई.
‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक, हर किरदार रहा यादगार
नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक लंबे करियर में एक से बढ़कर एक किरदार निभाए. ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अपहरण’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया. उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर विलेन और कॉमेडी तक हर तरह के किरदार को अपनी खास शैली दी. अभिनय के अलावा उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया और 1991 में ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के जरिए निर्देशक के तौर पर शुरुआत की. उन्हें अपने शानदार अभिनय के लिए तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्म श्री जैसे सम्मान भी मिले.
सिनेमा के साथ किसानों से भी रहा गहरा रिश्ता
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक अभिनेता तक सीमित नहीं थी. वह किसानों और ग्रामीण परिवारों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी लगातार आवाज उठाते रहे. सामाजिक कामों से जुड़े उनके प्रयासों में किसानों और सूखा प्रभावित परिवारों की मदद भी शामिल रही. उनका पुणे वाला फार्महाउस भी उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा था, जहां वह खेती करते थे और सादगी से समय बिताना पसंद करते थे. यही वजह है कि उनकी अंतिम विदाई के लिए भी इसी जगह को चुना गया. नाना पाटेकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दमदार किरदार, संवाद और सिनेमा में छोड़ी गई छाप लंबे समय तक दर्शकों के बीच जिंदा रहेगी.
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