नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में संसद में अमेरिका से अवैध रूप से निर्वासित भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर जवाब दिया. राज्यसभा में बोलते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि सभी देशों का यह दायित्व है कि अगर उनके नागरिक वहां अवैध रूप से रह रहे पाए जाते हैं तो उन्हें वापस बुलाएं. उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि भारतीय सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में है ताकि निर्वासित व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न हो. हैंड-कफिंग पर पूछे गए सवाल के जवाब में जयशंकर ने बताया कि यह अमेरिका का मानक प्रोटोकॉल है जो अवैध प्रवासियों के लिए लागू किया जाता है.
104 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा गया
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि कल (5 फरवरी) 104 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा गया. भारतीय सरकार को इन व्यक्तियों के बारे में पहले से जानकारी थी और यह भारत था जिसने उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि की. जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि यह नया मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसा मुद्दा है जो समय-समय पर हो रहा है. उन्होंने बताया कि भारतीय अधिकारी हर निर्वासित व्यक्ति से बात कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कैसे अमेरिका पहुंचे, कौन एजेंट थे, और ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएं.
महिलाओं और बच्चों के निर्वासन पर कोई पाबंदी नहीं
जयशंकर ने अवैध प्रवास उद्योग के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि निर्वासित व्यक्तियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां संबंधित एजेंट्स और संगठनों के खिलाफ आवश्यक और प्रभावी कदम उठाएंगी. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में निर्वासन प्रक्रिया को इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के तहत लागू किया जाता है और इस प्रक्रिया के तहत हवाई जहाज से निर्वासन के लिए 2012 से एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अपनाई जा रही है, जिसमें प्रवासी को काबू करने के लिए पाबंदियां लागू की जाती हैं. जयशंकर ने यह भी बताया कि ICE से सूचना मिली है कि महिलाओं और बच्चों के निर्वासन पर कोई पाबंदी नहीं है.
ये भी पढ़ेंः फ़िल्म 'द मेहता बॉयज़' को मिली शानदार प्रतिक्रिया, इंडस्ट्री की जानी-मानी हस्तियों ने स्क्रीनिंग में लुटाया प्यार