France Student Protest: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की सुविधाओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन शुक्रवार को हिंसक झड़पों में बदल गया. पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब देश के कई हिस्सों तक फैल चुका है. छात्रों ने स्कूलों के गेट ब्लॉक किए, आगजनी और तोड़फोड़ की और पुलिस के साथ कई जगहों पर भिड़ंत हुई. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. अधिकारियों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की है. वहीं, 400 से ज्यादा स्कूल शुक्रवार को बंद रहे और 560 से अधिक शिक्षण संस्थानों में प्रदर्शन या व्यवधान की सूचना मिली.
स्कूलों की सुविधाओं और पढ़ाई के तरीके को लेकर नाराजगी
छात्रों का कहना है कि स्कूलों में कक्षाएं जरूरत से ज्यादा लंबी हैं, कई जगह कक्षाओं में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और गर्म मौसम में क्लासरूम का तापमान भी परेशानी बढ़ाता है. इसके अलावा शिक्षक कर्मचारियों की कमी, बड़ी कक्षाओं और पुराने स्कूल भवनों को लेकर भी छात्र आवाज उठा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार स्कूलों में संसाधन बढ़ाए, पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए और जर्जर इमारतों की स्थिति सुधारे. रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान 170 छात्रों और 65 स्कूल कर्मचारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है.
21 सितंबर से शुरू हुआ आंदोलन पूरे फ्रांस में फैला
इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर के आसपास पेरिस क्षेत्र के हाई स्कूलों से हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में यह देशभर में फैल गया. गुरुवार को 1,000 से ज्यादा हाई स्कूलों में किसी न किसी तरह का प्रदर्शन या हड़ताल दर्ज की गई थी. शुक्रवार को कई शहरों में छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद किए और कुछ जगह आगजनी की घटनाएं भी हुईं. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने के बाद कई स्थानों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. सरकार ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की निंदा की है, जबकि छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी मूल मांगें शिक्षा व्यवस्था की स्थिति सुधारने से जुड़ी हैं.
सरकार ने बुलाई आपात बैठक
बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस सरकार ने आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की और स्कूलों में सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं. शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने छात्र संगठनों, शिक्षकों और अभिभावकों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है. सरकार का कहना है कि छात्रों की कुछ मांगें जायज हैं, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता. दूसरी ओर, छात्र और उनके समर्थक बेहतर शिक्षण परिस्थितियों, पर्याप्त स्टाफ और स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग पर कायम हैं.
ये भी पढ़ें: फ्लाईदुबाई कांड पर आरपार के मूड में इजरायल, नेतन्याहू ने दी बड़ी चेतावनी, फिर शुरू होगा युद्ध?