ईरान में असीम मुनीर की सरेआम बेइज्जती! रेजाई ने दिखाई ऐसी बेरुखी, मुंह ताकते रह गए पाकिस्तानी फील्ड मार्शल

Asim Munir Iran Visit: ईरान दौरे पर पहुंचे पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर को मोहसेन रेजाई से मुलाकात के दौरान ठंडे रुख का सामना करना पड़ा. यूरेनियम को देश से बाहर भेजने और हूती हमलों के मुद्दे पर भी तेहरान ने अपना रुख सख्त रखा है.

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Asim Munir Iran Visit: तेहरान में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत से किसी ठोस नतीजे की खबर नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर का मकसद ईरान और पाकिस्तान के बीच समझौते की संभावनाएं तलाशने के साथ सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों को रुकवाने में तेहरान का सहयोग हासिल करना था. हालांकि, ईरान ने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम को देश से बाहर भेजने के मुद्दे पर अपना रुख सख्त रखा.

ईरान में असीम मुनीर की मुलाकातों से क्या निकला?

पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने 20 अक्टूबर को तेहरान में ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की. इस दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू कराने के लिए रास्ता तलाशना था. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका को पहले उनकी शर्तें पूरी करनी होंगी और भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने भी बातचीत के दौरान परमाणु सामग्री देश से बाहर भेजने की संभावना को खारिज कर दिया. 

यूरेनियम पर ईरान का दोटूक जवाब

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि देश में मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री का एक छोटा-सा हिस्सा भी बाहर नहीं भेजा जाएगा. उन्होंने इसे ईरानी जनता की राष्ट्रीय संपत्ति बताया, जिसका इस्तेमाल देश के भीतर ही किया जाना है. रेजाई ने यह भी कहा कि अमेरिका को पहले भरोसा कायम करने के लिए ईरान की शर्तें पूरी करनी होंगी. उनके इस बयान से साफ है कि परमाणु सामग्री को लेकर तेहरान फिलहाल अपने रुख में बदलाव के लिए तैयार नहीं है. 

सऊदी अरब पर हूती हमलों का मुद्दा भी अहम

असीम मुनीर के तेहरान दौरे में सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों का मुद्दा भी उठाया गया. पाकिस्तान की ओर से ईरान से आग्रह किया गया कि वह हूती समूह पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हमले रुकवाने में मदद करे. पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक, इस बार की बातचीत में सऊदी अरब की सुरक्षा और हूती हमलों को रोकने पर खास जोर दिया गया. यह मुद्दा इस्लामाबाद के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है. 

अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान ने रखीं शर्तें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी असीम मुनीर के साथ मुलाकातों में अमेरिका के साथ बातचीत फिर शुरू करने को लेकर अपनी शर्तें सामने रखीं. ईरान का कहना है कि वॉशिंगटन को पहले धमकियों और दबाव की नीति छोड़नी होगी तथा भरोसा बहाल करने के लिए कदम उठाने होंगे. ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता के बावजूद अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाना आसान नहीं दिख रहा है. 

पाकिस्तान की मध्यस्थता के सामने चुनौती

असीम मुनीर का दौरा ऐसे समय हुआ है, जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहा है. साथ ही, इस्लामाबाद चाहता है कि क्षेत्रीय तनाव कम हो और सऊदी अरब पर हमलों का खतरा घटे. लेकिन परमाणु सामग्री को देश से बाहर न भेजने और अमेरिका से बातचीत के लिए पहले शर्तें पूरी करने पर ईरान के सख्त रुख ने कूटनीतिक प्रयासों को मुश्किल बना दिया है. फिलहाल, इन मुलाकातों से किसी बड़े समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. 

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