पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है. दो दिनों के भीतर पार्टी के तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और सोमवार, 2 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. इनमें अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं.
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा से दिया इस्तीफा
अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को अपना इस्तीफा भेजा. उन्होंने 1 नवंबर 2026 से अपनी विधानसभा सीट छोड़ने की बात कही है. इसके बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए.
कुंवर विजय प्रताप सिंह 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में आए थे. हालांकि, भगवंत मान सरकार और पार्टी नेतृत्व के साथ उनके लंबे समय से मतभेद चल रहे थे. वह कई बार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके थे.
बेअदबी मामलों की जांच में देरी पर जताई थी नाराजगी
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले और उससे जुड़े पुलिस फायरिंग मामलों में न्याय मिलने में देरी को लेकर पंजाब सरकार की आलोचना की थी. जनवरी 2023 में जांच से जुड़े मतभेदों के बाद उन्होंने विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.
उन्होंने राज्य में नशे, अपराध, जबरन वसूली और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए थे. जून 2025 में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी और विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर भी उन्होंने आपत्ति जताई थी. उनके सार्वजनिक बयानों को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए AAP ने 2025 में उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था.
रविवार को दो विधायकों ने छोड़ी थी पार्टी
इससे पहले रविवार, 1 नवंबर को समाना से विधायक और भगवंत मान सरकार में मंत्री रह चुके चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
दोनों के इस्तीफे ऐसे समय आए, जब पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी. हालांकि, इस सूची में समाना और सनौर सीटों के उम्मीदवारों के नाम शामिल नहीं थे.
2027 के चुनाव से पहले AAP के सामने चुनौती
तीनों विधायकों के सोमवार को बीजेपी में शामिल होने से पंजाब में आम आदमी पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले पार्टी के तीन विधायकों का साथ छोड़ना उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.