प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च, 2025 को अपनी दो दिवसीय यात्रा के तहत मॉरीशस पहुंचकर भारत-मॉरीशस संबंधों को और भी मजबूती देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. यह यात्रा 2015 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की मॉरीशस के लिए दूसरी यात्रा है, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को और भी प्रगाढ़ करेगी. इस दौरान पीएम मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जो न केवल भारत और मॉरीशस के बीच मजबूत रिश्तों की पुष्टि करेगा, बल्कि इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक सशक्त संदेश भी भेजेगा.
भारत और मॉरीशस का ऐतिहासिक जुड़ाव
मॉरीशस की कुल 1.2 मिलियन आबादी का लगभग 70% हिस्सा भारतीय मूल का है, जो भारत के साथ इस द्वीप राष्ट्र के गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक रिश्तों को दर्शाता है. 12 मार्च का दिन विशेष रूप से ऐतिहासिक है क्योंकि 1901 में महात्मा गांधी, जो दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट रहे थे, ने मॉरीशस में भारतीय प्रवासी समुदाय से मुलाकात की थी. उनके इस दौरे ने भारतीय कामगारों को शिक्षा, राजनीतिक जागरूकता और भारत से जुड़े रहने की प्रेरणा दी थी, और तब से 12 मार्च को मॉरीशस राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है.
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की रणनीति
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण भारत ने मॉरीशस के साथ अपने रिश्तों को और भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं. चीन, यूरोप, रूस, और अन्य देशों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, भारत के लिए इस रणनीतिक क्षेत्र में अपने प्रभाव को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है. पीएम मोदी की यात्रा में यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि भारत इस क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.
इस यात्रा के दौरान, भारत और मॉरीशस समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जो व्हाइट-शिपिंग सूचना साझा करने की प्रणाली स्थापित करेगा. यह समझौता हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ मॉरीशस के व्यापारिक मार्गों की रक्षा करने में भी सहायक होगा. इसके अलावा, भारत और मॉरीशस के बीच वित्तीय और व्यापारिक संबंध भी गहरे होते जा रहे हैं. 2023-24 में मॉरीशस भारत में सबसे बड़ा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) स्रोत बन चुका है.
भारत की लगातार सहायता
भारत ने पिछले दशक में मॉरीशस को 1.1 बिलियन डॉलर की विकास सहायता दी है, जिसमें मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना और अन्य जन-हितकारी योजनाएं शामिल हैं. इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं जैसे वाकाशियो तेल रिसाव संकट और साइक्लोन चिडो के दौरान भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आया. इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने मॉरीशस को आपूर्ति और चिकित्सा सहायता प्रदान की.
भारत और मॉरीशस के संबंध केवल व्यापार और सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच अब स्पेस सेक्टर में भी सहयोग बढ़ रहा है. 2023 के नवंबर में दोनों देशों ने एक ज्वाइंट सैटेलाइट डेवलपमेंट समझौता किया है, जिससे दोनों देशों के लिए अत्यधिक लाभकारी तकनीकी विकास होगा. इसके साथ ही, भारत मॉरीशस के छात्रों को ITEC (Indian Technical and Economic Cooperation) कार्यक्रम के तहत तकनीकी प्रशिक्षण भी देता है. इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक लगभग 4,940 मॉरीशस नागरिकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो भारत-मॉरीशस सहयोग को एक नए स्तर पर पहुंचाता है.
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