इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना है कि देश की सेना का सरकार के कामकाज और विदेश नीति पर काफी प्रभाव है. उनके इस बयान ने पाकिस्तान के उस राजनीतिक सिस्टम पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे वहां ‘हाइब्रिड निजाम’ कहा जाता है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की राजनीति में बढ़ती भूमिका को लेकर लगातार चर्चा हो रही है.
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार भले ही लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई हो, लेकिन ख्वाजा आसिफ के बयान के मुताबिक, बड़े सरकारी फैसलों में सेना की भूमिका अहम रहती है. पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर भी असीम मुनीर की बढ़ती ताकत पर सवाल उठा चुके हैं. उनका कहना है कि मुनीर ने तानाशाही के मामले में पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को भी पीछे छोड़ दिया है.
ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया है कि सरकार के बड़े फैसले सेना की मंजूरी और उसके प्रभाव के बीच लिए जाते हैं. हालांकि, उन्होंने इसे सैन्य शासन मानने से इनकार किया है. उनका कहना है कि पाकिस्तान में हाइब्रिड सिस्टम है, जिसमें नागरिक सरकार और सेना मिलकर काम करते हैं. इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भी अपने कार्यकाल के दौरान इस व्यवस्था को हाइब्रिड निजाम बता चुके थे.
पाकिस्तान की विदेश नीति में भी सेना का दखल
पाकिस्तान में सेना का प्रभाव सिर्फ सुरक्षा मामलों तक सीमित नहीं माना जाता. भारत, अफगानिस्तान, चीन और ईरान जैसे पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर भी सेना की अहम भूमिका रही है. 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद से कई बार सैन्य अधिकारी सीधे सत्ता संभाल चुके हैं. देश की राजनीति और सरकार के कामकाज में सेना का दखल भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है.
असीम मुनीर के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा गया. इस दौरे में मुनीर ने खुद अमेरिका जाकर ट्रंप से मुलाकात की थी. ख्वाजा आसिफ ने इस व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा है कि यह हाइब्रिड सिस्टम है, न कि सीधे तौर पर सैन्य शासन.
बाजवा के कार्यकाल बढ़ाने को लेकर भी हुआ था विवाद
ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के कार्यकाल को लेकर भी चर्चा हो रही है. हाल ही में दावा किया गया था कि बाजवा नवंबर 2022 में अपना कार्यकाल बढ़वाना चाहते थे. ख्वाजा आसिफ पहले कह चुके हैं कि बाजवा ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया तो वह मार्शल लॉ लगा सकते हैं.
हालांकि, पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर मलिक मोहम्मद ने बाजवा को लेकर किए गए इस दावे को खारिज किया था. इस मामले को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में पहले भी बहस हो चुकी है.
असीम मुनीर को लेकर राजनीतिक हलचल तेज
पाकिस्तान में असीम मुनीर की बढ़ती ताकत को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि वह शहबाज शरीफ सरकार पर प्रांतों के पुनर्गठन का दबाव बना रहे हैं. इसके अलावा, यह दावा भी किया जा रहा है कि मुनीर शहबाज शरीफ की जगह मोहसिन नकवी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं.
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है. फिलहाल ख्वाजा आसिफ के बयान ने पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में सेना की भूमिका को लेकर बहस फिर तेज कर दी है.