रूस की मांगो से बौखलाया अमेरिका! नहीं होगी पुतिन और ट्रंप की मुलाकात?

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव सामने आया है. अगले महीने बुडापेस्ट में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच उच्चस्तरीय बैठक को अब रद्द कर दिया गया है.

Why white house cancels putin and trump meeting
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव सामने आया है. अगले महीने बुडापेस्ट में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच उच्चस्तरीय बैठक को अब रद्द कर दिया गया है. यह बैठक यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच एक अहम कड़ी मानी जा रही थी. लेकिन अब इस मुलाकात के रद्द होने से शांति प्रयासों पर गहरा असर पड़ा है.


रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अमेरिका को भेजे एक औपचारिक मेमो में ऐसी शर्तें रखीं जिन्हें वॉशिंगटन “अस्वीकार्य” मानता है. रूस ने न केवल अमेरिका से कठोर आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग की, बल्कि अपने कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता की भी शर्त रखी. इन मांगों को सुनकर अमेरिकी प्रशासन ने तुरंत बैठक को रद्द करने का फैसला लिया. व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान तो नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, अमेरिका अब रूस के साथ किसी “औपचारिक बातचीत” के मूड में नहीं है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि “निकट भविष्य में ट्रंप और पुतिन की कोई बैठक प्रस्तावित नहीं है.”

ट्रंप की झुंझलाहट और बदलती प्राथमिकताएं

अमेरिकी राजनीति में यह भी चर्चा है कि डोनाल्ड ट्रंप का अब रूस के प्रति रुख पहले जैसा नहीं रहा. पहले वे बार-बार यह दावा करते थे कि “पुतिन के साथ उनकी व्यक्तिगत समझ इतनी गहरी है कि वे एक दिन में यूक्रेन युद्ध खत्म कर सकते हैं.” लेकिन पिछले कुछ दिनों में ट्रंप का स्वर बदला हुआ नजर आया. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे पुतिन से “हताश और निराश” महसूस कर रहे हैं. फ्लोरिडा में हुई अमेरिकी अधिकारियों और रूसी प्रतिनिधियों की बैठक के बाद ट्रंप ने साफ कहा कि  मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता. जब तक वास्तविक इच्छाशक्ति नहीं दिखेगी, तब तक किसी औपचारिक शिखर वार्ता का कोई अर्थ नहीं. यह बयान इस बात का संकेत है कि ट्रंप फिलहाल रूस के साथ सीधी बातचीत से बचना चाहते हैं.

कूटनीतिक संबंधों पर बढ़ा तनाव

राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच तनावपूर्ण संबंधों को और गहराई में ले जा सकता है. बीते कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने की कोशिशें कई बार नाकाम रही हैं. रूस के प्रस्तावों और अमेरिका की प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की दीवार पहले से कहीं ऊंची हो चुकी है. कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस बैठक के रद्द होने से न केवल यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की उम्मीद को झटका लगा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी “एक चिंताजनक संकेत” है.

शांति वार्ता की राह अब और मुश्किल

वर्तमान परिस्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और रूस के बीच आने वाले महीनों में कोई नई वार्ता शुरू होगी या नहीं. हालांकि यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र ने अभी भी बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखे हैं, लेकिन हालात पहले से कहीं अधिक जटिल दिख रहे हैं.विश्लेषकों का मानना है कि जब तक रूस अपनी मांगों में नरमी नहीं दिखाता और अमेरिका कूटनीतिक लचीलापन नहीं अपनाता, तब तक यूक्रेन युद्ध के अंत का कोई ठोस समाधान सामने नहीं आएगा.

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