हर साल अगस्त में, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बीजिंग से गायब हो जाते हैं. क्योंकि अग्सत से पहले से ही जिनपिंग बीजिंग से नदारद हैं, तो इस तरह की चर्चा की जा रही है कि आखिर हर साल ऐसा क्यों होता है. माना जा रहा है कि वह इस बार भी पार्टी नेताओं के साथ छुट्टियां मनाने के लिए बेदाईहे जाएंगे, जो बीजिंग से करीब तीन घंटे की दूरी पर स्थित एक समुद्री रिसॉर्ट है. लेकिन शी की हर साल की इस "गायब हो जाने" की परंपरा पर अब अंतरराष्ट्रीय हलकों में सवाल उठने लगे हैं. क्या यह सिर्फ एक परंपरा है, या फिर इसके पीछे सत्ता में अस्थिरता के संकेत छिपे हुए हैं?
बेदाईहे को केवल एक समुद्री रिसॉर्ट के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक और रणनीतिक स्थल है, जहां पार्टी के शीर्ष नेता हर गर्मी में अपनी नीतियां तय करने के लिए इकट्ठा होते हैं. माओ त्से तुंग के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है, और हर साल पार्टी के नेता वहां गुप्त मीटिंग्स आयोजित करते हैं. हालांकि, इस बार परिस्थितियां थोड़ी अलग हैं.
इस बार क्यों सब कुछ अलग है
2025 में, चीन की आर्थिक स्थिति में भारी संकट है. युवाओं में बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर पर है, संपत्ति बाजार लगातार गिर रहा है, और वैश्विक दबाव बढ़ता जा रहा है. इसके अलावा, शी जिनपिंग के करीबी सहयोगियों के अचानक पदों से हटाए जाने या गायब होने की खबरें भी तूल पकड़ रही हैं. पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग और रक्षा मंत्री ली शांगफु का अचानक पद छोड़ना और फिर उनकी चुप्पी ने पार्टी के भीतर कुछ गड़बड़ी की आशंका को जन्म दिया है. इन सब घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी के अंदर कोई बड़ी उथल-पुथल चल रही है? क्या शी जिनपिंग की सत्ता अब चुनौती के सामने है?
शी जिनपिंग की सत्ता पर संकट?
द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, शी जिनपिंग ने 2022 में तीसरे कार्यकाल के बाद अपनी ताकत को पूरी दुनिया में स्थापित किया था, लेकिन अब वह सत्ता के संकट का सामना करते हुए दिखाई दे रहे हैं. वह अपनी छवि को लेकर हमेशा बेहद संवेदनशील रहे हैं, और उनकी गैरमौजूदगी से अब कई सवाल उठने लगे हैं. चीन के साथ अमेरिका के रिश्ते, रूस से दोस्ती, और साउथ चाइना सी में सैन्य मोर्चाबंदी जैसी महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर उनका नेतृत्व दुनिया के लिए अहम है. अगर उनकी शक्ति में कोई कमजोरी आती है, तो इसका असर न केवल चीन, बल्कि दुनिया भर पर पड़ेगा.
2023 में भी दिखी थी यही तस्वीर
हालांकि, यह कोई नई घटना नहीं है. पिछले साल अगस्त में भी शी जिनपिंग अचानक सार्वजनिक मंचों से गायब हो गए थे, और कुछ ही हफ्तों बाद चीन ने अपने रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को बर्खास्त कर दिया था. यह घटनाएं बताती हैं कि उनके अचानक ओझल हो जाने के बाद पार्टी में कुछ न कुछ हो सकता है.
इस बार क्यों अजीब लग रहा है
हर साल अगस्त में पार्टी के नेता बेदाईहे रिट्रीट में सीक्रेट समर मीटिंग्स करते हैं, लेकिन इस बार स्थिति काफी अलग है. ताइवान के साथ तनाव अपने चरम पर है, और अमेरिका से संबंध भी चुनौतीपूर्ण हैं. इसके अलावा, घरेलू स्तर पर बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और रियल एस्टेट का बाजार ढहने की कगार पर है. ऐसे में, राष्ट्रपति का अचानक गायब हो जाना कुछ असामान्य और चिंताजनक माना जा रहा है. क्या इस बार शी जिनपिंग को दबाव का सामना करना पड़ेगा? क्या हम फिर से पिछले साल जैसी किसी बड़ी राजनीतिक हलचल के साक्षी बनेंगे? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा, लेकिन यह साफ है कि चीन की सत्ता में हलचल जारी है, और इसके परिणाम केवल चीन तक सीमित नहीं होंगे.
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