दुनिया भर के ईसाई समुदाय को गहरा झटका लगा है। आज यानी सोमवार 21 अप्रैल को ईसाई धर्म के सबसे बड़े धार्मिक गुरू पोप फ्रांसिस का निधन हो गया. उन्होंने 88 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. उन्होंने 12 साल तक कैथोलिक चर्च की कमान संभाली. उनके निधन के बाद सबके जहन में यही सवाल उठ रहा है कि अगला पोप कौन होगा? चलिए आपको वो पांच नाम बताते हैं जो इस वक्त पोप के पद के लिए चर्चा में बने हुए हैं.
कैसे होगा नए पोप का चुनाव?
पोप के निधन के बाद अब जल्द ही वेटिकन में "कॉन्क्लेव" की प्रक्रिया शुरू होगी. जहां दुनिया भर के कार्डिनल गुप्त मतदान से नए पोप का चुनाव करेंगे। यह एक धार्मिक परंपरा, राजनीतिक संतुलन और आध्यात्मिक दिशा का संगम होता है।
भारत की भूमिका भी अहम
दिलचस्प बात यह है कि इस बार पोप चुनाव में भारत की उपस्थिति भी विशेष मायने रखती है. दो भारतीय कार्डिनल्स को इस ऐतिहासिक चुनाव में वोट देने का अधिकार है. हालांकि कार्डिनल जॉर्ज एलेन्चेरी अब 80 वर्ष के हो चुके हैं और उनका मताधिकार समाप्त हो गया है, लेकिन हाल ही में कार्डिनल बने जॉर्ज कूवाकड मतदान में भाग लेंगे. वे वेटिकन में अंतरधार्मिक संवाद के प्रमुख हैं और उनके अनुभव इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
ये पांच नाम बने हुए हैं चर्चा का विषय
1. कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन (70 वर्ष) – वेटिकन का अनुभवी चेहरा
वेटिकन के "सेक्रेटरी ऑफ स्टेट" के रूप में पारोलिन लंबे समय से चर्च की कूटनीति और प्रशासन की धुरी रहे हैं। वे इटली के हैं और पोप फ्रांसिस के सबसे करीबी सलाहकारों में शामिल रहे हैं।
2. कार्डिनल पीटर एर्डो (72 वर्ष) – परंपरा के संरक्षक
हंगरी के एर्डो चर्च के सबसे सख्त रूढ़िवादी चेहरों में गिने जाते हैं। वो तलाकशुदा और पुनर्विवाहित कैथोलिकों को होली कम्यूनियन देने के विरोध में हैं और पारंपरिक मूल्यों के पक्षधर हैं।
3. कार्डिनल मातेओ ज़ुप्पी (69 वर्ष) – समावेशिता के पैरोकार
इटली के ज़ुप्पी चर्च में एक प्रगतिशील और संवादात्मक सोच के लिए जाने जाते हैं। LGBTQ , तलाकशुदा और हाशिए के लोगों के लिए चर्च को और स्वीकार्य बनाने की दिशा में उन्होंने मजबूत आवाज़ उठाई है।
4. कार्डिनल रेमंड बर्क (70 वर्ष) – कट्टर रुख के प्रवक्ता
अमेरिका से आने वाले बर्क, पोप फ्रांसिस की कई नीतियों के प्रबल आलोचक रहे हैं। उन्होंने चर्च की उदार नीतियों के खिलाफ अपनी स्पष्ट राय रखी है, जिससे वे रूढ़िवादी धड़े के प्रिय बन चुके हैं।
5. कार्डिनल लुइस एंटोनियो टैगले (67 वर्ष) – एशिया से उम्मीद की किरण
फिलीपींस के टैगले को अगर पोप बनाया जाता है, तो वे पहले एशियाई पोप होंगे। वे मानवीयता, करुणा और सामाजिक न्याय के बड़े समर्थक हैं। LGBTQ और तलाक जैसे मुद्दों पर उन्होंने चर्च की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है।
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