Shehbaz Sharif Davos: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान पीस बोर्ड के फाउंडिंग चार्टर पर हस्ताक्षर किए. इसके साथ ही ट्रंप द्वारा प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया गया. यह बोर्ड दुनिया भर में चल रहे युद्धों और संघर्षों को सुलझाने के उद्देश्य से गठित किया गया है.
पीस बोर्ड के लॉन्च के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि इस पहल का प्रारंभिक लक्ष्य गाजा में लागू युद्धविराम को और मजबूती देना है. उन्होंने कहा कि यह बोर्ड शांति बहाली के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा, जहां अलग-अलग देशों के बीच संवाद और सहयोग के जरिए समाधान निकाले जाएंगे.
#WATCH | US President Donald Trump, along with other members, including Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif signs the 'Board of Peace Charter' in Davos, Switzerland.
— ANI (@ANI) January 22, 2026
(Source: US Network Pool via Reuters) pic.twitter.com/e80UBXZZiK
हस्ताक्षर समारोह के दौरान कुल 22 देशों ने इस चार्टर पर दस्तखत किए. इन देशों में अमेरिका, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बेल्जियम, बुल्गारिया, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. इस सूची में आठ इस्लामिक देशों की मौजूदगी को खास माना जा रहा है, जो मध्य पूर्व और इस्लामिक दुनिया में शांति प्रयासों के लिहाज से अहम संकेत मानी जा रही है.
कुछ बड़े देशों ने बनाई दूरी
हालांकि, सभी प्रमुख पश्चिमी देशों ने इस पहल का हिस्सा बनने का फैसला नहीं किया है. फ्रांस, नॉर्वे, स्लोवेनिया, स्वीडन और ब्रिटेन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बोर्ड में शामिल नहीं होंगे. वहीं कई अन्य देशों की ओर से अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है, जिससे इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं.
ट्रंप और शहबाज शरीफ की तस्वीर चर्चा में
इस साइनिंग सेरेमनी के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति ट्रंप नजर आ रहे हैं. तस्वीर में शहबाज शरीफ को ट्रंप के कान में कुछ कहते हुए देखा जा सकता है, जबकि ट्रंप उनके हाथों पर थपकी देते दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं.
60 देशों को भेजा गया था न्योता
व्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई है कि इस बोर्ड में शामिल होने के लिए करीब 60 देशों को आमंत्रण भेजा गया था. इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, अर्जेंटीना, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के शीर्ष नेता मौजूद रहे. हालांकि, भारत की ओर से इस साइनिंग सेरेमनी में कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ, जो कई लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.
सितंबर 2025 में रखा गया था प्रस्ताव
गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर 2025 में गाजा युद्ध को समाप्त करने की योजना पेश करते हुए पहली बार बोर्ड ऑफ पीस के गठन का प्रस्ताव रखा था. उसी समय यह जानकारी सामने आई थी कि अमेरिका ने लगभग 60 देशों को इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है.
सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का योगदान
इस बोर्ड से जुड़े एक मसौदा चार्टर के अनुसार, जो देश तीन साल से अधिक समय तक बोर्ड की सदस्यता बनाए रखना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा. यह शर्त इस बोर्ड को आर्थिक रूप से मजबूत और स्वतंत्र बनाने के उद्देश्य से रखी गई है.
बोर्ड ऑफ पीस की भूमिका क्या होगी?
बोर्ड ऑफ पीस के अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे. शुरुआती दौर में यह बोर्ड गाजा में शांति बहाली और युद्धविराम को स्थायी बनाने पर फोकस करेगा. इसके बाद इसका दायरा बढ़ाकर अन्य अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक संघर्षों को सुलझाने की दिशा में काम किया जाएगा.
कुल मिलाकर, बोर्ड ऑफ पीस की शुरुआत को ट्रंप की विदेश नीति का एक बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, यह पहल वास्तव में वैश्विक शांति की दिशा में कितना प्रभावी साबित होगी, इसका जवाब आने वाले समय में इसके कामकाज और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से ही मिल पाएगा.
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