गगनयान से लेकर इलेक्ट्रिक सैटेलाइट्स तक... साल 2026 में ISRO के सात बड़े मिशन, जान लीजिए पूरा प्लान

नया साल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है. साल 2026 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने अब तक के सबसे व्यस्त और महत्वाकांक्षी मिशन शेड्यूल के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है.

Which are the big missions of ISRO in the year 2026
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

ISRO: नया साल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है. साल 2026 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने अब तक के सबसे व्यस्त और महत्वाकांक्षी मिशन शेड्यूल के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है. मार्च 2026 तक ही इसरो सात बड़े मिशनों को अंजाम देने की योजना बना चुका है. इनमें मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़े परीक्षण, उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, नई लॉन्च तकनीकें और निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसे कई अहम लक्ष्य शामिल हैं.

सफल LVM3-M6 मिशन के बाद इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय अंतरिक्ष शक्ति नहीं रहा, बल्कि तेजी से वैश्विक स्पेस लीडर बनने की दिशा में बढ़ रहा है. 2026 का मिशन कैलेंडर इसरो की इसी बदलती पहचान को दर्शाता है.

PSLV-C62 से होगी साल की शुरुआत

साल 2026 की पहली लॉन्चिंग जनवरी में PSLV-C62 मिशन के साथ होने की उम्मीद है. इस मिशन के तहत EOS-N1 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. यह उपग्रह हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक से लैस होगा, जो पृथ्वी की सतह का बेहद सूक्ष्म विश्लेषण करने में सक्षम है. यह तकनीक पारंपरिक लाल, हरे और नीले रंग तक सीमित न होकर हर पिक्सेल के लिए प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्घ्य का डेटा इकट्ठा करती है. इससे कृषि, खनिज संसाधन, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को बड़ी मदद मिलेगी.

पहली बार पूरी तरह उद्योगों द्वारा बना PSLV

फरवरी 2026 में प्रस्तावित PSLV-N1 मिशन इसरो के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा. यह पहली बार होगा जब PSLV रॉकेट का निर्माण पूरी तरह से भारतीय उद्योगों के कंसोर्टियम—हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T)—द्वारा किया जाएगा. यह कदम भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण और इंडस्ट्री भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है.

इस मिशन में लॉन्च किया जाने वाला सैटेलाइट समुद्र विज्ञान से जुड़ा अहम डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे मछली उद्योग, मौसम पूर्वानुमान और जलवायु अनुसंधान को फायदा होगा.

मार्च 2026: गगनयान G1 मिशन पर सबकी नजर

मार्च 2026 में प्रस्तावित गगनयान G1 मिशन इस साल का सबसे अहम मिशन माना जा रहा है. इस मिशन में ह्यूमन-रेटेड LVM3 रॉकेट के जरिए ‘व्योममित्र’ नामक महिला ह्यूमनॉइड रोबोट को कक्षा में भेजा जाएगा. यह पूरी तरह से बिना क्रू वाली उड़ान होगी, जिसका मकसद मानव मिशन से पहले सुरक्षा प्रणालियों की जांच करना है.

इस मिशन के दौरान लाइफ सपोर्ट सिस्टम, री-एंट्री टेक्नोलॉजी और समुद्र में रिकवरी जैसी अहम प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा. यह मिशन 2027 में प्रस्तावित मानवयुक्त उड़ान की नींव तैयार करेगा.

TDS-01 से सैटेलाइट तकनीक में बड़ा बदलाव

मार्च में ही TDS-01 टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर मिशन भी लॉन्च किया जाएगा. यह मिशन सैटेलाइट इंजीनियरिंग में एक बड़ा बदलाव ला सकता है. इसमें हाई-थ्रस्ट इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा. इस तकनीक के जरिए सैटेलाइट में इस्तेमाल होने वाले ईंधन का वजन करीब 90 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.

केमिकल प्रोपल्शन से इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन की ओर यह बदलाव हल्के, सस्ते और लंबे समय तक काम करने वाले उपग्रहों के निर्माण का रास्ता खोलेगा.

SSLV-L1 से छोटे सैटेलाइट बाजार पर फोकस

मार्च 2026 से पहले स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV-L1) का एक समर्पित कमर्शियल या टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन मिशन भी प्रस्तावित है. यह मिशन छोटे उपग्रहों के तेजी से लॉन्च की क्षमता को दिखाएगा और निजी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा. SSLV को खासतौर पर स्टार्टअप्स और छोटे सैटेलाइट ऑपरेटर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

GSLV-F17 से NVS-03 की लॉन्चिंग

साल के मध्य तक GSLV-F17 मिशन के तहत NVS-03 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजे जाने की उम्मीद है. यह एक रणनीतिक पृथ्वी अवलोकन और नेविगेशन से जुड़ा अहम उपग्रह होगा, जो देश की नेविगेशन क्षमताओं को और मजबूत करेगा.

साल के अंत में गगनयान G2 मिशन

2026 के अंत में गगनयान G2 मिशन प्रस्तावित है. यह गगनयान कार्यक्रम की दूसरी बिना क्रू वाली ऑर्बिटल उड़ान होगी. 2027 में होने वाले मानवयुक्त मिशन से पहले यह अंतिम बड़ा परीक्षण माना जा रहा है. इस मिशन का उद्देश्य सभी स्वचालित प्रणालियों की विश्वसनीयता को परखना और यह सुनिश्चित करना है कि हर सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सही तरीके से काम करे.

इस मिशन के साथ ही भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान करने वाले देशों के चुनिंदा समूह में शामिल होने के और करीब पहुंच जाएगा.

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