Tejas Mk-2: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस Mk-2 की पहली उड़ान को लेकर अब स्पष्ट समय-सीमा तय होती दिख रही है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में बताया कि तेजस Mk-2 के जून से जुलाई 2026 के बीच पहली बार उड़ान भरने की संभावना है.
डॉ. कामत ने यह जानकारी रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक पॉडकास्ट ‘रक्षा सूत्र’ में बातचीत के दौरान दी. उनके बयान से संकेत मिलता है कि तेजस Mk-2 परियोजना अब डिजाइन और विकास के शुरुआती चरणों से आगे बढ़कर निर्णायक परीक्षण चरण की ओर बढ़ रही है.
मीडियम वेट फाइटर के रूप में बड़ा कदम
DRDO प्रमुख के अनुसार, पहली उड़ान की यह समय-सीमा किसी अनुमान के आधार पर नहीं बल्कि डिजाइन, सिस्टम इंटीग्रेशन और प्री-फ्लाइट परीक्षणों के गहन मूल्यांकन के बाद तय की गई है. तेजस Mk-2 को मौजूदा तेजस Mk-1A का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण माना जा रहा है.
जहां तेजस Mk-1A एक हल्का लड़ाकू विमान है, वहीं Mk-2 को मीडियम वेट फाइटर (MWF) श्रेणी में विकसित किया जा रहा है. इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन लगभग 17.5 टन होगा, जबकि Mk-1A का वजन करीब 13.5 टन है. इससे Mk-2 को अधिक ईंधन, हथियार और आधुनिक सिस्टम ले जाने की क्षमता मिलेगी.
दमदार इंजन और आधुनिक डिजाइन
तेजस Mk-2 की सबसे बड़ी खासियत इसका GE F414-INS6 इंजन होगा. यह इंजन लगभग 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करने में सक्षम है, जो मौजूदा तेजस के इंजन की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली है.
बेहतर एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल के लिए इस विमान में कैनार्ड्स (फ्रंट कंट्रोल सरफेस) लगाए जाएंगे, जिससे इसकी फुर्ती, स्थिरता और युद्धक क्षमता में सुधार होगा.
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस Mk-2 केवल एक नया फाइटर जेट नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी सेतु भी साबित होगा.
चुनौतीपूर्ण लेकिन यथार्थवादी समय-सीमा
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की योजना के मुताबिक, तेजस Mk-2 का पहला एयरफ्रेम मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास रोल-आउट किया जाएगा. आम तौर पर किसी नए लड़ाकू विमान के रोल-आउट और पहली उड़ान के बीच लगभग छह महीने का अंतर होता है.
इस दौरान कई महत्वपूर्ण परीक्षण किए जाते हैं, जिनमें:
शामिल होते हैं. ऐसे में जून–जुलाई 2026 की पहली उड़ान की समय-सीमा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह DRDO, ADA और HAL के बढ़ते आत्मविश्वास को भी दर्शाती है.
भारतीय वायुसेना के लिए क्यों है अहम?
तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह विमान मिराज-2000, जगुआर और मिग-29 जैसे पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेने में मदद करेगा, जो धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं.
समय पर तेजस Mk-2 की उड़ान और परीक्षण शुरू होने से वायुसेना को अपनी स्क्वाड्रन संख्या बनाए रखने में बड़ी राहत मिल सकती है. लंबे समय से स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही वायुसेना के लिए यह कार्यक्रम रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.
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