Quit Sugar For 30 Days: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मीठी चीजें हमारी डाइट का अहम हिस्सा बन चुकी हैं. चाय-कॉफी में चीनी, कोल्ड ड्रिंक, मिठाइयां, पैकेज्ड जूस और स्नैक्स के जरिए हम अनजाने में जरूरत से कहीं ज्यादा शुगर का सेवन कर लेते हैं. यही अतिरिक्त चीनी लंबे समय में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है. ऐसे में इन दिनों 'नो शुगर चैलेंज' तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें लोग एक महीने तक अतिरिक्त चीनी से दूरी बनाकर शरीर में होने वाले बदलावों को महसूस करने की कोशिश करते हैं. आइए जानते हैं कि 30 दिनों तक अतिरिक्त चीनी छोड़ने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या है 30 दिन का नो शुगर चैलेंज?
नो शुगर चैलेंज का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको फलों, दूध या प्राकृतिक रूप से मिलने वाली मिठास को भी छोड़ देना है. इसका उद्देश्य केवल उन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना है जिनमें प्रोसेसिंग के दौरान अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है. इनमें कोल्ड ड्रिंक, मिठाइयां, केक, कुकीज, कैंडी, फ्लेवर वाले दही, पैकेज्ड जूस, मीठे पेय और कई तरह की सॉस शामिल हैं. इस दौरान संतुलित आहार पर जोर दिया जाता है, जिसमें ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, अंडे, मछली, चिकन, मेवे और घर का बना पौष्टिक भोजन शामिल होता है.
ब्लड शुगर को मिल सकता है बेहतर संतुलन
हेल्थ संबंधी जानकारी देने वाली वेबसाइट Healthline के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक अतिरिक्त चीनी का सेवन बंद कर देता है, तो इसका सकारात्मक असर ब्लड शुगर के स्तर पर दिखाई दे सकता है. अधिक मात्रा में चीनी खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, जिससे समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित होने और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. चीनी का सेवन कम करने से शरीर को ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर हो सकती है.
वजन घटाने में मिल सकती है मदद
अगर आपका लक्ष्य वजन कम करना है, तो अतिरिक्त चीनी छोड़ना एक अच्छा कदम साबित हो सकता है. मीठे खाद्य पदार्थों में आमतौर पर कैलोरी अधिक होती है, जबकि इनमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा कम होती है. ऐसे में इनका सेवन कम करने से कुल कैलोरी इनटेक घट सकता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि केवल चीनी छोड़ना ही पर्याप्त नहीं है. बेहतर परिणाम के लिए संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी होती है.
दांतों की सेहत पर भी पड़ सकता है अच्छा असर
चीनी का अधिक सेवन केवल शरीर ही नहीं, बल्कि दांतों के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है. मुंह में मौजूद बैक्टीरिया चीनी को तोड़कर एसिड बनाते हैं, जो दांतों की ऊपरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचाता है. लंबे समय तक ज्यादा मीठा खाने से कैविटी और दांतों के सड़ने की समस्या बढ़ सकती है. यदि अतिरिक्त चीनी कम कर दी जाए, तो दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया की गतिविधि भी कम हो सकती है और ओरल हेल्थ बेहतर बनी रह सकती है.
दिल और लिवर की सेहत को भी हो सकता है फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा चीनी, खासकर फ्रुक्टोज वाले खाद्य पदार्थ, फैटी लिवर की समस्या का जोखिम बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा अधिक चीनी का सेवन हाई ट्राइग्लिसराइड्स, खराब कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों से भी जुड़ा हुआ है, जो आगे चलकर हृदय रोगों का कारण बन सकती हैं. ऐसे में यदि अतिरिक्त चीनी कम कर दी जाए और उसकी जगह पौष्टिक भोजन को अपनाया जाए, तो लिवर और दिल दोनों की सेहत को लंबे समय में फायदा मिल सकता है.
ऊर्जा का स्तर रह सकता है अधिक स्थिर
अक्सर मीठी चीजें खाने के तुरंत बाद शरीर में ऊर्जा महसूस होती है, लेकिन यह ऊर्जा ज्यादा देर तक नहीं टिकती. कुछ समय बाद थकान और सुस्ती महसूस होने लगती है. इसके विपरीत, साबुत अनाज, फल, सब्जियां और प्रोटीन से भरपूर भोजन धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे शरीर पूरे दिन अधिक स्थिर महसूस कर सकता है. यही कारण है कि नो शुगर चैलेंज अपनाने वाले कई लोग कुछ दिनों बाद खुद को पहले की तुलना में ज्यादा ऊर्जावान महसूस करने की बात करते हैं.
क्या सभी लोगों को अपनाना चाहिए यह चैलेंज?
अतिरिक्त चीनी कम करना अधिकांश लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है. यदि किसी को डायबिटीज, हाइपोग्लाइसीमिया या कोई अन्य गंभीर बीमारी है, तो डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है. संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली ही लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें दी गई जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों द्वारा उपलब्ध कराई गई सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है. किसी भी प्रकार का डाइट प्लान अपनाने या अपनी खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह अवश्य लें.
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