Uttarakhand Budget: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.23 करोड़ रुपये का बजट पेश किया. यह बजट पिछले साल के मुकाबले लगभग 11.41 प्रतिशत अधिक है. बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक मजबूती, सामाजिक प्रगति और सभी वर्गों के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही.
उन्होंने कहा कि सरकार संकल्प से सिद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ रही है और जनादेश का सम्मान करते हुए प्रदेश के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है. बजट भाषण के दौरान उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड सहित सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का भी उल्लेख किया.
‘संतुलन’ बजट की अवधारणा
मुख्यमंत्री धामी ने इस बजट को राज्य के लिए “संतुलन” (SANTULAN) बजट बताया. उनके अनुसार यह बजट समावेशी विकास और संतुलित प्रगति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. SANTULAN का अर्थ समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था से है. सरकार का लक्ष्य इन सिद्धांतों के आधार पर प्रदेश को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है.
चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट
धामी सरकार का यह मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट है, क्योंकि अगले वर्ष राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसी वजह से बजट में गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है. मुख्यमंत्री ने बजट की प्राथमिकताओं को GYAN के रूप में समझाया, जिसमें गरीब कल्याण, युवा सशक्तिकरण, अन्नदाता यानी किसानों का हित और नारी सशक्तीकरण शामिल है. सरकार ने इस बार जेंडर बजट भी बढ़ाया है. वर्ष 2026-27 के लिए जेंडर बजट 19,692.02 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 16,961.32 करोड़ रुपये था.
स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इस बजट में 4,252.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि पूंजीगत मद में 195 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. राज्य के कई जिलों जैसे बागेश्वर, डोईवाला, हरिद्वार, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, देहरादून, टिहरी और नैनीताल में अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं पर काम जारी है. इसके अलावा अटल आयुष्मान योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. खाद्यान्न योजना के लिए 25 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 298.45 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.
महिला और बाल कल्याण योजनाएं
महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं. नंदा गौरा योजना के लिए 220 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 47.78 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के लिए 25 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के लिए 15 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के लिए 13.44 करोड़ रुपये रखे गए हैं. निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए भी 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है.
सामाजिक और आर्थिक विकास पर फोकस
सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के विकास के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि तय की गई है. अनुसूचित जातियों के विकास के लिए 2,400 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजातियों के लिए 746.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वहीं अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के लिए 98 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए 60 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के लिए 10 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए 62.29 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है.
शिक्षा और युवाओं के लिए पहल
शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए गैर-सरकारी महाविद्यालयों को सहायता अनुदान के रूप में 155.38 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. शिक्षा मित्रों के मानदेय के भुगतान के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा युवाओं के भविष्य और कौशल विकास को ध्यान में रखते हुए सीएम युवा भविष्य निर्माण योजना के तहत 10 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है.
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