इंडोनेशिया ने हाल ही में खुलासा किया है कि 18 अप्रैल को अमेरिका का 7वां बेड़ा, USS मिगुएल कीथ, मलक्का की खाड़ी से होकर गुजरा। यह जहाज खासतौर पर समुद्र में एक कमांड सेंटर की तरह काम करता है और इसमें हेलिकॉप्टर उड़ाने से लेकर छोटे जहाजों का संचालन, साथ ही सैनिकों के रहने की व्यवस्था तक संभव है। मलक्का स्ट्रेट, जो दक्षिण एशिया और अन्य महत्वपूर्ण देशों के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, अब अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी के कारण चर्चा का केंद्र बन चुका है, और इसने चीन को चिंता में डाल दिया है।
एशिया से यूरोप और मध्य-पूर्व तक का रास्ता
मलक्का स्ट्रेट इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित है और इन तीन देशों का इसमें नियंत्रण है। यह जलमार्ग हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ता है और एशिया को यूरोप और मध्य-पूर्व से जोड़ने का सबसे छोटा समुद्री रास्ता है। यही वजह है कि यह समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है। हर साल करीब 80,000 जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री मार्गों में से एक बन जाता है।
दुनिया का समुद्री व्यापार: मलक्का की अहमियत
मलक्का स्ट्रेट न सिर्फ एक जहाज मार्ग है, बल्कि यह दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनुमान के मुताबिक, दुनिया के लगभग 25 से 40% समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है। लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 330 लाख करोड़ रुपये) का सामान हर साल इस रास्ते से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। विशेष रूप से, तेल व्यापार के संदर्भ में भी यह मार्ग अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रतिदिन लगभग 2.3 से 2.5 करोड़ बैरल तेल यहां से गुजरता है, जो चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों तक पहुँचता है।
चीन के लिए यह रास्ता क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
चीन के लिए मलक्का स्ट्रेट अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस मार्ग से उसके लगभग 60 से 80% तेल आयात होते हैं। इसलिए चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे "मलक्का डिलेमा" (दुविधा) कहा था, जिसका मतलब है कि यदि कभी यह रास्ता बंद हो जाए, तो चीन की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। मलक्का की अहमियत चीन के लिए इतनी अधिक है कि यह आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
मलक्का स्ट्रेट: अमेरिका की रणनीति और चीन की चिंता
अमेरिका का इस क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव और सक्रियता चीन के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन चुकी है। अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सैन्य और राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, और मलक्का स्ट्रेट पर अपनी नजर बनाए हुए है। अमेरिका की रणनीति स्पष्ट रूप से चीन को काउंटर करने की दिशा में है, क्योंकि चीन इस मार्ग पर निर्भर है। इसके अलावा, भारत की रणनीतिक स्थिति भी इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि भारत इस मार्ग के निकट स्थित है और वह इस क्षेत्र में अपनी शक्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
क्या होगा अगर मलक्का स्ट्रेट बंद हो जाए?
अगर कभी मलक्का स्ट्रेट बंद या बाधित हो जाता है, तो जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा, जैसे कि लोम्बोक या सुंडा स्ट्रेट। यह न केवल समय की बर्बादी होगी, बल्कि लागत भी बढ़ेगी। इसके अलावा, तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है और दुनिया भर में सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दवाइयाँ और रोजमर्रा की वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
वैश्विक चोकपॉइंट्स
अगर हम वैश्विक चोकपॉइंट्स की बात करें, तो साउथ चाइना सी सबसे व्यस्ततम और महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है, जहां से कुल वैश्विक व्यापार का 37.1% हिस्सा गुजरता है। इसके बाद स्ट्रेट ऑफ मलक्का (34.5%), बाब-अल-मंदेब (22.6%) और स्वेज नहर (22.9%) आते हैं। इन इलाकों में किसी भी तरह का तनाव या संकट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर तात्कालिक असर डालता है, जिससे व्यापार और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होते हैं।
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