UP SIR: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद 10 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई. करीब 166 दिनों तक चले इस बड़े अभियान के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नई सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 13,39,84,792 मतदाता हो गए हैं, जो पहले के मुकाबले 84 लाख से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है.
अंतिम सूची के मुताबिक राज्य में पुरुष मतदाता 7,30,71,061 हैं, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6,09,09,525 तक पहुंच गई है. इसके अलावा 4,206 तृतीय लिंग मतदाता भी शामिल हैं. मसौदा सूची की तुलना में कुल 84,28,767 नए मतदाता जुड़े हैं. इसमें पुरुष मतदाताओं में 42,27,902 और महिला मतदाताओं में 42,00,778 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
युवाओं की भागीदारी में बड़ा उछाल
इस बार 18-19 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. इस श्रेणी में 14 लाख से अधिक नए युवा मतदाता जुड़े हैं, जिससे कुल संख्या 17,63,360 तक पहुंच गई है. यह बदलाव आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है.
मतदाता सूची में इस बार जेंडर रेशियो में भी सुधार हुआ है. पहले यह आंकड़ा 824 था, जो अब बढ़कर 834 हो गया है. इससे साफ है कि महिला मतदाताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.
इन जिलों में सबसे ज्यादा बढ़े वोटर्स
प्रदेश के कई जिलों में मतदाता संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है. सबसे ज्यादा वृद्धि प्रयागराज में दर्ज की गई, जहां 3.29 लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े. इसके बाद लखनऊ, बरेली, गाजियाबाद और जौनपुर जैसे जिलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. यह रुझान बताता है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
विधानसभा क्षेत्रों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अगर विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो साहिबाबाद सीट सबसे आगे रही, जहां 82,898 नए मतदाता जुड़े. इसके अलावा जौनपुर, लखनऊ पश्चिम, लोनी और फिरोजाबाद विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में वोटर्स का इजाफा हुआ है.
कैसे चला पूरा अभियान
यह अभियान 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था. नवंबर से दिसंबर के बीच गणना चरण चला और 6 जनवरी 2026 को मसौदा सूची प्रकाशित की गई. इसके बाद 6 मार्च तक दावा और आपत्तियां ली गईं. 27 मार्च तक सभी मामलों की सुनवाई और सत्यापन पूरा किया गया, जिसके बाद 10 अप्रैल को अंतिम सूची जारी कर दी गई.
प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी
इस व्यापक प्रक्रिया में प्रदेश के 75 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों की निगरानी में काम हुआ. 403 निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी, 12,758 सहायक अधिकारी, 18 हजार से अधिक सुपरवाइजर और करीब 1.77 लाख बूथ लेवल अधिकारी इस अभियान में शामिल रहे. साथ ही 5.82 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स ने भी सहयोग किया.
नोटिस और सुनवाई की पूरी प्रक्रिया
सत्यापन के दौरान करीब 1.04 करोड़ मतदाताओं ने मिलान नहीं कराया था, जबकि 2.22 करोड़ मामलों में विसंगतियां पाई गईं. इन सभी मामलों में नोटिस जारी किए गए और जनवरी से मार्च के बीच सुनवाई कर निस्तारण किया गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना तय प्रक्रिया के किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया.
मतदाताओं के लिए नई सुविधाएं
मतदाताओं की सहूलियत के लिए ‘बुक ए कॉल विद BLO’ जैसी सुविधा शुरू की गई, जिसके जरिए मतदाता सीधे अपने बूथ लेवल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. इस सेवा के तहत 8 लाख से अधिक कॉल बुक की गईं और अधिकांश मामलों में सफल संपर्क हुआ. इसके अलावा हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी समस्याओं का समाधान किया गया.
शिकायत निस्तारण में बेहतर प्रदर्शन
विशेष अभियान के दौरान 1 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से लगभग सभी का समाधान कर दिया गया. इसके अलावा जन शिकायत निवारण प्रणाली के तहत आई सभी शिकायतों का भी शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया, जो प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है.
राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी
इस पूरे अभियान में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई. राज्य और जिला स्तर पर कई बैठकों का आयोजन किया गया, जिनमें पुनरीक्षण प्रक्रिया की जानकारी दी गई और दलों से सुझाव भी लिए गए. बूथ लेवल एजेंट्स के जरिए जमीनी स्तर पर भी दलों की भागीदारी सुनिश्चित की गई.
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