Smriti Mandhana: 60 दिन पहले टूटी शादी, पर बिखरने की जगह निखर गईं मंधाना, WPL फाइनल में किया कमाल

किसी भी खिलाड़ी के लिए मैदान के बाहर की उथल-पुथल और मैदान के भीतर का दबाव दोनों को एक साथ संभालना आसान नहीं होता.

Smriti Mandhana leads RCB to victory in WPL final 2026 Final
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Smriti Mandhana: किसी भी खिलाड़ी के लिए मैदान के बाहर की उथल-पुथल और मैदान के भीतर का दबाव दोनों को एक साथ संभालना आसान नहीं होता. लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट की स्टार खिलाड़ी स्मृति मंधाना ने यह साबित कर दिया कि असली चैंपियन वही होता है जो निजी जिंदगी के कठिन दौर में भी अपने प्रोफेशन पर पूरी तरह फोकस बनाए रखता है. हाल ही में उनके निजी जीवन से जुड़ी एक खबर ने सुर्खियां बटोरी थीं, जब यह सामने आया कि उनकी शादी पलाश मुच्छल से तय होने के बाद टूट गई. यह फैसला उनके लिए भावनात्मक रूप से आसान नहीं रहा होगा, लेकिन स्मृति ने इस निजी दर्द को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.

करीब 60 दिन पहले आए इस निजी झटके के बावजूद स्मृति मंधाना ने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा और अपने खेल के जरिए जवाब दिया. महिला प्रीमियर लीग (WPL) के फाइनल मुकाबले में उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने यह साफ कर दिया कि मुश्किल समय में भी वह खुद को टूटने नहीं देतीं, बल्कि और ज्यादा निखरकर सामने आती हैं.

फाइनल मुकाबले में दिखा स्मृति का आत्मविश्वास

WPL फाइनल में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) को 204 रनों जैसे बड़े लक्ष्य का पीछा करना था. इतना बड़ा लक्ष्य किसी भी टीम पर दबाव बना सकता है, खासकर फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में. ऐसे समय पर टीम को एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है जो न केवल रन बनाए, बल्कि बाकी खिलाड़ियों को भी आत्मविश्वास दे सके.

स्मृति मंधाना ने कप्तान की भूमिका निभाते हुए पारी की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने पावरप्ले में ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. शानदार टाइमिंग, बेहतरीन फुटवर्क और सही गेंदों पर आक्रामक शॉट्स खेलते हुए स्मृति ने महज 41 गेंदों पर 87 रनों की तूफानी पारी खेली. उनकी इस पारी में चौकों-छक्कों की बरसात देखने को मिली और दिल्ली की गेंदबाजी लाइनअप पूरी तरह दबाव में आ गई.

यह पारी सिर्फ रनों का आंकड़ा नहीं थी, बल्कि यह उस मानसिक मजबूती का प्रतीक थी, जिसके दम पर स्मृति ने व्यक्तिगत परेशानियों को पीछे छोड़कर मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

आखिरी ओवर तक रोमांच, RCB ने जीता खिताब

मैच के आखिरी ओवरों में मुकाबला काफी रोमांचक हो गया. स्मृति मंधाना के आउट होने के बाद ऐसा लगा कि कहीं मैच RCB के हाथ से निकल न जाए. आखिरी ओवर में राधा यादव के चौके और लिजेल ली के हाथ से छूटे स्टंप जैसे नाटकीय पल देखने को मिले, जिसने दर्शकों की धड़कनें तेज कर दीं.

हालांकि अंत में RCB की टीम ने संयम बनाए रखा और छह विकेट से जीत दर्ज कर महिला प्रीमियर लीग का खिताब अपने नाम कर लिया. यह जीत टीम के लिए ऐतिहासिक थी, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी कहानी स्मृति मंधाना का वह संघर्ष और नेतृत्व रहा, जिसने टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला.

निजी जीवन की चुनौतियों से निकलकर बनीं प्रेरणा

स्मृति मंधाना की यह सफलता सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने की कहानी नहीं है. यह उस जज्बे की कहानी है जिसमें एक खिलाड़ी निजी जीवन की कठिन परिस्थितियों से गुजरने के बावजूद अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट से पीछे नहीं हटती. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 नवंबर को स्मृति और पलाश मुच्छल की शादी होनी थी, लेकिन वह शादी टल गई और बाद में 7 दिसंबर को यह जानकारी सामने आई कि दोनों ने शादी कैंसल करने का फैसला किया है.

ऐसे फैसले किसी भी इंसान के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होते हैं. लेकिन स्मृति ने खुद को कमजोर पड़ने नहीं दिया. उन्होंने मैदान पर अपना फोकस बनाए रखा और अपनी मेहनत के दम पर यह साबित कर दिया कि एक खिलाड़ी की पहचान उसके प्रदर्शन से होती है, न कि उसकी निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव से.