Single Papa Review: आज के ओटीटी दौर में ऐसी सीरीज कम ही देखने को मिलती हैं, जो एक साथ हंसाती भी हों और दिल को छू भी जाएं. नेटफ्लिक्स की नई ओरिजिनल सीरीज ‘सिंगल पापा’ इसी दुर्लभ कैटेगरी में खुद को मजबूती से खड़ा करती नजर आ रही है. शुक्रवार, 12 दिसंबर को रिलीज हुई यह छह एपिसोड की कॉमेडी-ड्रामा सीरीज सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है और दर्शक इसकी सादगी, भावनात्मक गहराई और रिलेटेबल कहानी की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
सीरीज में कुणाल केमू ने गौरव गहलोत उर्फ GG का किरदार निभाया है. गौरव एक तलाकशुदा, तीस-बत्तीस साल का दिल्ली का युवक है, जो अभी भी अपनी जिंदगी की दिशा तलाश रहा है. वह अपने माता-पिता के साथ रहता है, आर्थिक रूप से पिता पर निर्भर है और परिवार के बिजनेस में बस नाम के लिए काम करता है. उसकी जिंदगी यूं ही बहती जा रही होती है, तभी वह एक ऐसा फैसला लेता है जो सब कुछ बदल देता है. एक लावारिस बच्चे को गोद लेने का फैसला. गौरव उस बच्चे का नाम अमूल रखता है और यहीं से शुरू होती है जिम्मेदारियों, उलझनों, सामाजिक सवालों और आत्मिक बदलावों से भरी एक नई यात्रा. पारंपरिक भारतीय परिवार की पृष्ठभूमि में यह कहानी कई भावनात्मक परतें खोलती है.
सोशल मीडिया पर मिली शानदार प्रतिक्रिया
रिलीज के कुछ ही घंटों बाद दर्शकों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने रिव्यू साझा करने शुरू कर दिए. कई यूजर्स ने लिखा कि सीरीज हल्के-फुल्के हास्य के जरिए एक गंभीर विषय को बेहद सहजता से उठाती है. कुछ लोगों का मानना है कि कहानी कहीं-कहीं लड़खड़ाती जरूर है, लेकिन किरदारों के बीच के रिश्ते और सामाजिक सोच पर उठाए गए सवाल इसे खास बना देते हैं. एक दर्शक ने इसे “बिंज-वॉच” बताते हुए कहा कि उन्होंने पूरी रात जागकर सीरीज खत्म कर दी. वहीं कई लोगों को शिकायत सिर्फ इतनी रही कि यह बहुत जल्दी खत्म हो गई.
कुणाल केमू और दयानंद शेट्टी की खास छाप
गौरव के किरदार में कुणाल केमू की परफॉर्मेंस को खूब सराहा जा रहा है. उन्होंने एक ऐसे इंसान को पर्दे पर उतारा है, जो परफेक्ट नहीं है, लेकिन दिल से सच्चा और ईमानदार है. उनकी एक्टिंग में कमजोरी, डर और हास्य का संतुलन साफ नजर आता है. वहीं दयानंद शेट्टी ने ‘पर्बत सिंह’ नाम के एक मेल नैनी यानी “मैननी” का रोल निभाया है. बच्चों की देखभाल में पुरुषों की भूमिका को सामान्य बनाने के लिए यह किरदार दर्शकों को खासा पसंद आ रहा है.
समाज के संवेदनशील सवालों को छूती कहानी
‘सिंगल पापा’ सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह भारत में अविवाहित पुरुषों द्वारा गोद लेने की कानूनी और सामाजिक चुनौतियों को भी सामने लाती है. मनोज पाहवा और आयशा रज़ा गौरव के माता-पिता के रोल में हैं, जो उसके फैसले पर खुलकर सवाल उठाते हैं. उनका तर्क है कि जो इंसान खुद अपनी जिंदगी संभाल नहीं पा रहा, वह बच्चे की जिम्मेदारी कैसे उठाएगा? नेहा धूपिया एक सोशल वर्कर के रूप में नजर आती हैं, जो गौरव की क्षमता पर शक करती हैं—यह उस सिस्टम की सोच को दर्शाता है, जहां सिंगल फादरहुड को आज भी संदेह की नजर से देखा जाता है.
मजबूत सपोर्टिंग कास्ट बनी कहानी की जान
सीरीज में प्राजक्ता कोली गौरव की बहन के किरदार में हैं, जिनकी शादी की तैयारियां घर की बदली हुई स्थिति से बार-बार टकराती हैं. सुहैल नय्यर उसके जिगरी दोस्त बने हैं, जबकि ईशा तलवार उसकी एक्स-वाइफ के रोल में दिखाई देती हैं. सभी किरदार कहानी को वास्तविक और जीवंत बनाते हैं.
बिना उपदेश दिए तोड़ती है रूढ़ियां
ईशिता मोइत्रा और नीरज उधवानी द्वारा लिखी और प्रोड्यूस की गई ‘सिंगल पापा’ खुद को एक सच्ची ‘स्लाइस ऑफ लाइफ’ ड्रामेडी के रूप में पेश करती है. यह सीरीज बिना भाषण दिए समाज की जमी-जमाई सोच पर सवाल उठाती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. अगर आपने अभी तक ‘सिंगल पापा’ नहीं देखी है, तो यह सीरीज हंसी, आंसुओं और सोचने पर मजबूर कर देने वाले पलों का एक खूबसूरत पैकेज साबित हो सकती है.
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