Shoorveer Surat Conclave: Bharat 24 गर्व के साथ प्रस्तुत करता है, Shoorveer Surat Conclave एक अनोखा आयोजन जो समर्पित है सूरत पुलिस के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना को, यह मंच न सिर्फ उनकी कहानियों को सामने लाएगा, बल्कि उनके अनुभवों, चुनौतियों और विज़न को साझा करने का एक मौका भी बनेगा.
इस खास शाम में सूरत पुलिस के वीर अधिकारियों के साथ संवाद, सम्मान और सराहना का माहौल होगा. जहां उनके Shoorveer बनने की यात्रा को करीब से समझा जाएगा.
कैसे सूरत बना मिनी इंडिया
इस खास कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह ने शिरकत की. उनसे सुरत की सुरक्षा को लेकर खास-बातचीत हुई. उन्होंने बताया कि किस तरह दूसरे शहरों से भी लोग आकर सूरत में लोग यहां व्यापार करते हैं. उन्होंने कहा कि सूरत की पहचान आर्थिक राजधानी की तरह इसकी पहचान की जाती है.
इसकी सबसे खुबसूरत बात ही यही है कि देश के 28 राज्यों से लगभग 40-45 लाख लोग यहां रहते हैं. सभी लोग अपने अलग-अलग काम, व्यापार से जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि गुजरात राज्य के भी 33 जिलों में 40 से 45 लाख लोग यहां रहते हैं. आप ऐसा कह सकते हैं कि सूरत ने अपने आप में सभी को समाहित किया हुआ है.
ट्रैफिक को कैसे किया जाता है कंट्रोल?
पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह ने बताया कि सूरत में कई शहर से लोग यहां आकर रहते हैं. कभी उन्हें ऐसा नहीं महसूस कराया जाता कि वो किसी दूसरे शहर से यहां पहुंचे हैं. पुलिस हर व्यक्ति के साथ ऐसा बरताव करती है कि उन्हें ये शहर में भी अपनेपन का एहसास हो. वहीं जब उनसे सवाल किया गया कि आखिर लाखों लोगों के पहुंचने से ट्रैफिक की समस्या भी बढ़ती है इसपर क्या उपाय या फिर इसे कैसे मैनेज किया जाता है?
इसके जवाब में सिंह ने कहा कि सूरत शहर की लगभग पॉपुलेशन 85 लाख से भी अधिक है. वहीं अगर RTO के डेटा की मानी जाए तो लगभग 45 लाख गाड़ियां सूरत में हैं. इस तरह रोजाना 50 लाख से अधिक व्हीकल और ट्रैफिक सूरत में आता रहता है. उन्होंने कहा कि ट्रैफिक मैनेज करना एक साइड से मुमकिन नहीं हो सकता था. इसके लिए हमने पब्लिक से भी अप्रोच किया. उन्हें समझाया इसके बारे में अवेयरनेस फैलाई. इसी के कारण ट्रैफिक नियमों का आज जो पालन हो रहा है. लाखों की संख्या में लोग यहां आते हैं. इसमें एक बड़ा रोल सिग्नल्स का भी है. हमने इन्हीं सिग्नल्स को फॉलो किया और लोगों को इसके बारे में बताया.
यहां देखें Conclave:
अवेयरनेस से कम हुए एक्सीडेंट्स
उन्होंने कहा कि हमने लोगों को हेल्मट की वैल्यू को लेकर भी लोगों को जाग्रुक किया है. इसके लिए एक अभियान चलाया गया.जिसके कारण आज हेड इंजरीस के जो ज्यादा केस आते थे वो आज कम हो गए हैं. रोड पर जो लोगो का खून बहता था वो कम हुए है. इसमें लोग भी काफी ज्यादा सपोर्ट करते हैं. ट्रैफिक नियमों को व्यवस्थित करने में लोग भी सहायता करते हैं.