Shani Jayanti 2026: ज्येष्ठ अमावस्या को हर साल शनि जयंती मनाई जाती है, लेकिन जब यह दिन शनिवार के साथ जुड़ता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. देशभर में आज लोग शनि देव की पूजा कर उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तैयार हैं. शास्त्रों के अनुसार शनि देव सूर्य और मां छाया के पुत्र हैं और इंसान के कर्मों के अनुसार फल देते हैं. इस दिन यदि मन से पूजा की जाए, तो जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं और मन को शांति मिलती है.
शनि देव की पूजा के नियम
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- पवित्र होने के बाद व्रत का संकल्प लें.
- किसी शनि मंदिर जाएं या घर पर ही शनि देव की पूजा करें.
- शनि देव की मूर्ति के सामने सरसों के तेल का दीया जलाएं.
- पूजा में नीले फूल, काले तिल और शमी के पत्ते चढ़ाएं.
- सरसों के तेल से अभिषेक करें.
- मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें.
- शनि चालीसा का पाठ करने से मन का बोझ हल्का होता है.
- पूजा के दौरान सीधे शनि देव की आंखों में न देखें, चरणों की ओर देख कर ही हाथ जोड़ें.
पूजा की आवश्यक सामग्री
- सरसों का तेल
- काले तिल
- लोहे का छोटा टुकड़ा
- काली उड़द की दाल
- काला कपड़ा
- नीले फूल
शनि जयंती पर दान का महत्व
- जरूरतमंद को काले छाते, जूते, चप्पल या काला कंबल दें.
- गरीबों को खाना खिलाना और प्यासों को पानी पिलाना विशेष पुण्य का काम है.
- दान हमेशा बिना किसी लालच या स्वार्थ के करना चाहिए.
- ऐसा दान करने से ग्रहों की परेशानियाँ कम होती हैं और दूसरों की मदद करने का सुख मिलता है.
- शनि जयंती पर विशेष सावधानियां
- किसी भी बुजुर्ग या बेसहारा का दिल न दुखाएं.
- घर में शांति बनाए रखें, झगड़े से दूर रहें और साधारण भोजन करें.
- मांस, शराब या नशे से दूर रहें, अन्यथा पूजा का फल नहीं मिलता.
- झूठ न बोलें और किसी को धोखा न दें, क्योंकि भगवान सब देखते हैं.
- अगर तबीयत ठीक न हो तो भी परेशान न हों, शांत रहकर शनि देव का नाम लें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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