Russia-Taliban Defence Deal: रूस और अफगानिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मॉस्को ने तालिबान सरकार को एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने पर सहमति जता दी है. इस संभावित रक्षा समझौते को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे पाकिस्तान की रणनीतिक चिंताएं बढ़ सकती हैं.
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार तालिबान सरकार के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद हाल ही में रूस दौरे पर गए थे, जहां दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर विस्तृत बातचीत हुई. कहा जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान रूस ने अफगानिस्तान को आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली देने की दिशा में ठोस आश्वासन दिया.
तालिबान की सैन्य क्षमता बढ़ाने की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में केवल एयर डिफेंस सिस्टम ही नहीं, बल्कि अन्य जमीनी सैन्य उपकरण, सुरक्षा तकनीक और तालिबान बलों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रूस अफगानिस्तान को कौन-सा एयर डिफेंस सिस्टम देगा, लेकिन “एडवांस एयर डिफेंस” शब्द के इस्तेमाल ने कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तालिबान को आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली मिलती है तो अफगानिस्तान की रक्षा क्षमता पहले के मुकाबले काफी मजबूत हो सकती है. इससे पड़ोसी देशों, खासकर पाकिस्तान के लिए अफगान सीमा के भीतर सैन्य कार्रवाई करना आसान नहीं रहेगा.
मॉस्को में हुई अहम बैठक
बताया जा रहा है कि इस रक्षा समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर मॉस्को में रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और तालिबान सरकार के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए. यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब रूस और तालिबान प्रशासन के बीच संबंध लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं.
हालांकि रूस ने अभी तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संपर्क लगातार बढ़े हैं. अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद रूस उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा जिसने काबुल में अपना दूतावास बंद नहीं किया.
रूस के साथ गहराते संबंध
तालिबान सरकार लंबे समय से रूस के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रही है. बीते कुछ वर्षों में अफगान प्रतिनिधिमंडल कई बार मॉस्को का दौरा कर चुके हैं. तालिबान नेतृत्व रूस को क्षेत्र का प्रभावशाली और महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र मानता है.
रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने रूस दौरे के दौरान कहा कि रूस के साथ संबंध अफगानिस्तान के लिए विशेष महत्व रखते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और ज्यादा व्यापक और स्थिर होगा.
पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर तालिबान के पास आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम आ जाता है तो पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा खतरों के नाम पर अफगान क्षेत्र में कई बार हवाई हमले किए हैं. लेकिन एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम की मौजूदगी ऐसी कार्रवाइयों को कठिन बना सकती है.
इसी वजह से इस रक्षा समझौते को पाकिस्तान के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है. क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान की सैन्य क्षमता में वृद्धि दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की सुरक्षा राजनीति को प्रभावित कर सकती है.
क्या एस-400 सिस्टम देने की तैयारी?
हालांकि रूस ने अब तक यह नहीं बताया है कि वह कौन-सा सिस्टम देने वाला है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में यह संभावना जताई जा रही है कि मॉस्को अफगानिस्तान को अत्याधुनिक हवाई सुरक्षा तकनीक उपलब्ध करा सकता है. इसी कारण सोशल मीडिया और रणनीतिक हलकों में एस-400 जैसे सिस्टम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती से अफगानिस्तान की हवाई सुरक्षा क्षमता में बड़ा बदलाव आ सकता है.
2021 के बाद बदला समीकरण
अमेरिकी सेना की वापसी और 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद रूस ने अफगानिस्तान के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखे. मॉस्को ने न केवल काबुल में अपनी कूटनीतिक मौजूदगी बरकरार रखी बल्कि आर्थिक सहयोग भी बढ़ाया.
रूस और तालिबान प्रशासन के बीच 2022 में पहला बड़ा आर्थिक समझौता हुआ था, जिसके तहत रूस ने अफगानिस्तान को तेल, गैस और गेहूं की आपूर्ति शुरू की. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच संपर्क और मजबूत होते गए.
पुतिन भी दे चुके हैं संकेत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले भी यह संकेत दे चुके हैं कि अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखते हुए तालिबान प्रशासन के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है. उनका मानना है कि अफगानिस्तान पूरी तरह तालिबान के नियंत्रण में है और ऐसे में वर्तमान नेतृत्व से संपर्क बनाए बिना वहां की परिस्थितियों पर प्रभाव डालना संभव नहीं होगा.
रूस की नई रणनीति यह दिखाती है कि मॉस्को अब अफगानिस्तान को केवल सुरक्षा चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर भी देख रहा है.
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