राजगढ़: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की सुठालिया तहसील के नेवज गांव की 28 वर्षीय मंजू सौंधिया की कहानी किसी मेडिकल केस स्टडी से कम नहीं. दो बच्चों की मां और एक गृहिणी होने के बावजूद मंजू को एक ऐसी रहस्यमयी बीमारी ने घेर लिया है, जिसने उनकी और उनके पूरे परिवार की ज़िंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है.
सुबह से रात तक सिर्फ भूख
मंजू की बीमारी का सबसे चौंकाने वाला पहलू है, हर दिन 60 से 70 रोटियां खाना. जी हां, दिनभर में इतना खाना खा लेने के बावजूद उन्हें कभी तृप्ति महसूस नहीं होती. उल्टा, कमजोरी, घबराहट और बेचैनी उन्हें घेर लेती है, अगर समय पर खाना न मिले.
ये शारीरिक नहीं, मानसिक बीमारी है
शुरुआत में टाइफाइड के बाद पेट की दिक्कत समझी गई, लेकिन कई डॉक्टरों की सलाह और टेस्ट के बाद सामने आया कि यह कोई शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है. इस स्थिति में दिमाग खाने की आवश्यकता का फॉल्स सिग्नल देता है, जिससे व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है, भले ही शरीर को भोजन मिल चुका हो.
इलाज में फूका सब कुछ
मंजू का इलाज राजस्थान, भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में करवाया गया. कई तरह की दवाइयों और थेरेपी का सहारा लिया गया. पर परिणाम निराशाजनक रहे. अब तक 5-7 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, अधिकतर कर्ज और जमा पूंजी से. परिवार अब आर्थिक संकट से जूझ रहा है.
डॉक्टर की सलाह
मंजू का इलाज कर रहीं डॉ. कोमल दांगी बताती हैं कि ये पूरी तरह मानसिक बीमारी है. दवाओं के साथ-साथ मरीज को रोटी की जगह खिचड़ी, फल, दूध जैसे हल्के आहार की आदत डालनी चाहिए. लेकिन जब मरीज हर पल रोटी की मांग करे, तो व्यवहारिक रूप से यह आसान नहीं होता खासकर आर्थिक रूप से जूझते परिवार के लिए.
मंजू के भाई चंदर सिंह बताते हैं कि परिवार अब पूरी तरह टूट चुका है आर्थिक रूप से भी और भावनात्मक रूप से भी. उन्होंने सरकार और समाज से मदद की अपील की है. "बहन दिन-रात खाती है, लेकिन उसमें ताकत नहीं आती. कोई डॉक्टर या सरकारी योजना मदद करे तो शायद उसकी जिंदगी पटरी पर लौट सके."
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