लखनऊ: उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अवैध धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखते हुए "धर्मांतरण पर एक मजबूत और समान केंद्रीय कानून" बनाने की मांग की है.
डॉ. सिंह ने अपने पत्र और सार्वजनिक बयान में दावा किया है कि धर्मांतरण के नाम पर देश में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां चल रही हैं, जिन्हें रोकने के लिए अब समय आ गया है कि एक एकीकृत राष्ट्रीय कानून लाया जाए. उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक अस्मिता पर हमला है.
यह सिर्फ धर्म परिवर्तन नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय
डॉ. सिंह ने कहा, "धर्मांतरण को धार्मिक स्वतंत्रता बताकर जो हो रहा है, वह भारत के अस्तित्व और उसकी सांस्कृतिक पहचान पर सुनियोजित हमला है. जबरन, धोखे से या लालच देकर धर्म बदलवाना भावनात्मक और सांस्कृतिक आतंकवाद है."
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियों में कई बार "लव जिहाद" जैसे तरीकों का इस्तेमाल होता है, जिससे युवतियों को निशाना बनाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है. उन्होंने कहा, "लव जिहाद कोई कल्पना नहीं है. यह कट्टरपंथी घुसपैठ का एक सुनियोजित हथियार है, जिसे राष्ट्रविरोधी ताकतें इस्तेमाल कर रही हैं."
राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति की मांग
अपने बयान में डॉ. राजेश्वर सिंह ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को राजनीति या वोटबैंक के चश्मे से न देखें, बल्कि इसे राष्ट्रनीति के तहत समझें. उन्होंने कहा कि जो लोग धर्मांतरण को धार्मिक अधिकार कहकर बचाव कर रहे हैं, वे देश की सांस्कृतिक आत्मा को कमजोर करने वालों का परोक्ष समर्थन कर रहे हैं.
सिंह ने कहा, "यह समय राजनीति से ऊपर उठने का है. जब राष्ट्र की आत्मा पर हमला हो रहा हो, तो हर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को एक स्वर में आवाज उठानी चाहिए,"
'बेटियों की रक्षा के लिए जरूरी है सख्त कानून'
राजेश्वर सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित हमारी बेटियां होती हैं, जिनकी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने सेक्युलर दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर "राजनीतिक चुप्पी" साधे हुए हैं.
उन्होंने कहा, "हमारी बेटियों की अस्मिता अमूल्य है. अब केवल निंदा करने का समय नहीं है, बल्कि केंद्र को कानून बनाकर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए."
एक राष्ट्र, एक कानून की मांग दोहराई
डॉ. सिंह ने कहा कि अभी देश के कुछ राज्यों—जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और कर्नाटक—में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं. लेकिन एकरूपता के अभाव में इन कानूनों की प्रभावशीलता सीमित रह जाती है. सिंह ने कहा, "अब समय है कि ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की नीति पर चलते हुए एक केंद्रीय कानून लाया जाए, जिससे पूरे देश में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ एक जैसी कार्रवाई हो सके."