14 दिन पहले ही खरीदी थी बस... न होती ये खामियां तो बच जाती जान, जैसलमेर में कैसे हुआ बस हादसा?

राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार देर रात को दर्दनाक बस हादसा हुआ. इस हादसे ने कई लोगों की जान ली. जानकारी अनुसार बस के जल जाने से 20 लोगों की मौत हो गई. जहां 15 लोगों के हादसे में घायल होने की जानकारी सामने आई है.

Rajasthan Jaisalmer accident with new bus no emergency gates raised questions
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राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार देर रात को दर्दनाक बस हादसा हुआ. इस हादसे ने कई लोगों की जान ली. जानकारी अनुसार बस के जल जाने से 20 लोगों की मौत हो गई. जहां 15 लोगों के हादसे में घायल होने की जानकारी सामने आई है. सभी घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है. 

बताया गया कि हादसे में कुछ यात्री ऐसे थे जो बाहर की ओर निकल ही नहीं पाए. जबकि आग की लपटें इतनी तेजी से फैली की दरवाजा लॉक हो गया. जिस समय ये घटना घटी उस समय 35 यात्री बस के अंदर ही फंस गए. मौके पर मौजूद पीड़ितों से इस बारे में जानकारी ली गई. आखिर ये हादसा हुआ कैसे? कैसे समय रहते कई यात्री बस से नहीं निकल पाए. ऐसा इसलिए क्योंकि ये दर्दनाक हादसा कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है.

अगर दिया होता ध्यान, तो बच जाती जान 


पीड़ितों का कहना है कि जिस बस में वह लोग सवार थे उसमें कई तरह की खामियां थी. इन खामियों पर अगर ध्यान दिया जाता तो संभव था कि यात्रियों की जान आसानी से बच जाती. अब सवाल ये कि आखिर ऐसी क्या खामी थी, तो लोगों का कहना है कि तकनीकी कई सारी खामियां थी. 


कुछेक की अगर बात की जाए तो बस में सवार यात्रियों के लिए इमरजेंसी गेट नहीं था. ऐसे किसी हादसों में इस तरह के गेट सबसे काम आते हैं. लेकिन इस बस में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी. लोगों का कहना है कि मेन गेट पर आग लग गई थी. जिसके कारण बस को आग की लपटों ने ही घेर लिया और दरवाजा बुरी तरह से लॉक हो गया था. यात्री अंदर ही फंसे रहे. साथ ही जब धुआं उठा तो वेंटिलेशन का भी कोई सिस्टम नहीं था. इसे कम किया जा सकता था तो अंदर लगे फायर एक्टेंगुविशर से. लेकिन ऐसा नहीं था. 

नई बस के साथ हुआ ये हादसा 

आपको ये जानकर काफी हैरानी होगी कि जो ये बस हादसा हुआ वो किसी पुरानी बस के साथ नहीं बल्कि अभी खरीदी हुई थी. यानी इस बस को ममहज 14 दिन पहले ही खरीदा गया था. जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर को रजिस्ट्रेशन करवाया गया था. 9 को बस को परमिट मिला. लेकिन 14 तारीख को ही हादसा हो गया. हादसे में घायलों को जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.


हादसे के बाद बस की कुछ तकनीक खामियां उजागर हुई हैं. बस में यात्रियों को बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी गेट नहीं था. चूंकि मेन गेट आग की लपटों से घिर गया था और दरवाजा लॉक हो गया था. इस वजह से यात्री अंदर ही फंसे रहे. जब धुआं फैला तो कोई वेंटिलेशन सिस्टम था. अगर बस के अंदर फायर सिस्टम था तो क्यों काम नहीं किया, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं. 

बसों में होनी चाहिए ऐसी सुरक्षा 


यह सवाल भी सामने आता है कि आखिर ऐसे हादसों से बचने के लिए बसों में किस तरह की सुरक्षा का होना जरूरी है, तो आपको बता दें कि सबसे पहली चीज बसों में एक या फिर दो फायर एक्सटिंग्विशर होने चाहिए, ये बस के आगे और पीछे दोनों ओर होने चाहिए. समय रहते बस से बाहर निकला जा सके इसके लिए एक ऐसा दरवाजा भी जरूर होना चाहिए.  कई बार ऐसा होता है कि खिड़की भी जाम हो जाती है, या फिर हड़बड़ाहट में खिड़की नहीं खोल पाते. ऐसे में ग्लास ब्रेक हैमर भी शीशे पर होना बहुत जरूरी होता है. फायर रेसिस्टेंट मटीरियल यानी सीट, पर्दे और वायरिंग ऐसी हो जो आसानी से आग का सामना कर सके. बैकअप लाइट, CCTV कैमरे, GPS ट्रैकिंग सिस्टम, ऑटोमेटिक फायर अलर्ट सेंसर, स्पीड गवर्नर, AC सिस्टम और वायरिंग की इलेक्ट्रिकल टेस्टिंग रिपोर्ट अनिवार्य होनी चाहिए.

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