दुनिया पर मंडरा रहा अल नीनो का संकट, कई देशों में बढ़ेगा गर्मी का कहर, 4.5 लाख लोगों की जा सकती है जान

Scientist Prediction on Al Nino: प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली अल नीनो आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है.

powerful-el-nino-may-cause-451000-deaths-worldwide
Image Source: Social Media

Scientist Prediction on Al Nino: प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली अल नीनो आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है. जलवायु वैज्ञानिकों के एक नए आकलन के मुताबिक, इस घटना से पैदा होने वाली अतिरिक्त गर्मी के कारण दुनियाभर में करीब 4,51,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. यह अनुमान जलवायु परिवर्तन की वजह से पहले से बढ़ रही गर्मी से होने वाली मौतों से अलग है. शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस खतरे को लेकर समय रहते तैयारी की जरूरत पर जोर दिया है.

असामान्य गर्मी से बढ़ेगा जान का खतरा

वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच रहा है. अल नीनो के दौरान समुद्र के तापमान में होने वाला यह बदलाव दुनिया के कई क्षेत्रों में तापमान, बारिश और हवाओं के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है. क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन के अनुसार, 4,51,000 संभावित मौतों का आंकड़ा बेहद बड़ा है और इसके पीछे लाखों परिवारों और आम लोगों की जिंदगी प्रभावित होने का खतरा है.

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ती है चिंता?

अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से दिखाई देता है. कहीं अत्यधिक गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है तो कहीं भारी बारिश, बाढ़ और तूफानों की स्थिति बन सकती है. मौजूदा अल नीनो ऐसे दौर में विकसित हो रहा है, जब मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पहले ही बढ़ा हुआ है. ऐसे में वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी गर्मी से जुड़े प्रभाव और गंभीर हो सकते हैं.

भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है असर

आकलन के अनुसार भारत, इंडोनेशिया और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक कई क्षेत्रों में इस घटना के प्रभाव महसूस किए जा सकते हैं. अत्यधिक गर्मी के अलावा सूखा, जंगलों में आग और बाढ़ जैसी घटनाएं भी जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं. इसके साथ ही कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है. हालांकि यह आंकड़ा किसी निश्चित मौतों की भविष्यवाणी नहीं, बल्कि संभावित खतरे का अनुमान है, जिसका इस्तेमाल समय रहते तैयारी के लिए किया जा सकता है.

समय रहते तैयारी से कम हो सकता है नुकसान

वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके संभावित मानवीय नुकसान को कम करने के लिए पहले से तैयारी की जा सकती है. इसके लिए बेहतर हीट वेव पूर्वानुमान, कूलिंग सेंटर, अत्यधिक गर्मी के दौरान अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपाय अहम हो सकते हैं. स्थानीय प्रशासन अगर संवेदनशील इलाकों की पहले से पहचान कर ले और लोगों को समय पर चेतावनी दे, तो अत्यधिक गर्मी से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.

ये भी पढ़ें: कौन है वो महिला, जिसके पति को चीनी जेल से आजाद करवाने के लिए ट्रंप और जिनपिंग के बीच हो सकती है डील?