लंदन: यूरोपीय सुरक्षा और यूक्रेन संघर्ष को लेकर लंदन में यूरोपीय रक्षा सम्मेलन समाप्त हो गया है. इस बैठक का आयोजन ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने किया, जिसमें 15 देशों के प्रमुख, नाटो महासचिव, यूरोपीय संघ और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष शामिल हुए.
बैठक में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी मौजूद रहे, जिनका ब्रिटेन ने गर्मजोशी से स्वागत किया. सम्मेलन में यूरोप की सुरक्षा, यूक्रेन को सैन्य सहायता, और अमेरिका की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.
14 हजार करोड़ की सैन्य सहायता
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की कि यूक्रेन को हवाई रक्षा प्रणाली के लिए 14 हजार करोड़ रुपये (लगभग 1.7 बिलियन डॉलर) की मदद दी जाएगी.
स्टार्मर ने कहा, "यूक्रेन की सुरक्षा यूरोप की सुरक्षा से जुड़ी हुई है. ब्रिटेन इस संघर्ष में पूरी मजबूती से यूक्रेन के साथ खड़ा है और हम हर संभव मदद करेंगे."
यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं
बैठक के बाद यूरोपीय नेताओं ने यूरोप की सुरक्षा और यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता पर अपने विचार साझा किए:
उर्सुला वॉन डेर लेयेन (यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष) – "यूरोप को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी. हमें रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर काम करना होगा."
मार्क रूटे (नाटो महासचिव) – "यूरोप को तैयार रहना होगा. हमें यह तय करना होगा कि हम यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देने के लिए कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं."
डोनाल्ड टस्क (पोलैंड के राष्ट्रपति) – "यूरोप अब जाग चुका है. हम यूक्रेन का समर्थन करते रहेंगे और अपनी पूर्वी सीमाओं को और मजबूत करेंगे."
ब्रिटेन-यूक्रेन की गहरी होती साझेदारी
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की जब लंदन पहुंचे, तो ब्रिटेन की सड़कों पर उनके समर्थन में नारे लगे. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया और भरोसा दिलाया कि ब्रिटेन पूरी तरह से यूक्रेन के साथ खड़ा रहेगा.
इसके अलावा, ब्रिटेन ने यूक्रेन को 24 हजार करोड़ रुपये (लगभग 3 बिलियन डॉलर) का लोन भी दिया, जिससे यूक्रेन अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करेगा.
यूरोपीय संघ में फूटी दरार
हालांकि, यूरोपीय संघ के सभी देश इस मुद्दे पर एकमत नहीं हैं.
स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको – "हम यूक्रेन को सैन्य सहायता नहीं देंगे. युद्ध के दम पर रूस को बातचीत के टेबल पर लाना असंभव है."
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान – "जेलेंस्की कमजोर हैं. ट्रम्प ने अमेरिका की नीति को सही दिशा दी है."
अमेरिका पर उठे सवाल
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि अमेरिका कब तक यूरोप को सुरक्षा की गारंटी देता रहेगा. यूरोपीय नेताओं ने माना कि यदि अमेरिका अपने रुख में बदलाव करता है, तो यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए स्वतंत्र कदम उठाने होंगे.
आगे क्या?
6 मार्च को यूरोपीय परिषद में एक नया प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जिसमें यूरोप की सुरक्षा नीति को लेकर अहम फैसले लिए जाएंगे. ब्रिटेन और यूरोपीय देशों का साफ संदेश है कि यूक्रेन को हर हाल में समर्थन मिलता रहेगा, चाहे इसके लिए नई सुरक्षा रणनीति क्यों न बनानी पड़े.
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