Pakistan Afghanistan War: अफगानिस्तान में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं. इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान के गृह मामलों के मंत्री खलीफा सिराजुद्दीन हक्कानी ने शुक्रवार को खोस्त में जुमे की नमाज के बाद पाकिस्तान के खिलाफ तीखा बयान दिया. अपने खुतबे में उन्होंने साफ कहा कि अफगान जनता एकजुट है और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है.
हक्कानी ने अपने संबोधन में कहा कि अफगानिस्तान ने इतिहास में कई बड़े संघर्षों का सामना किया है और हर बार मजबूती से उभरा है. उन्होंने इशारों में कहा कि अगर हालात मजबूर करते हैं, तो अफगान लोग किसी भी चुनौती का सामना करने से पीछे नहीं हटेंगे. उनके बयान में यह भी झलक रहा था कि मौजूदा तनाव को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए.
افغان وزیرداخلہ خلیفہ سراج الدین حقانی خوست کی جامع مسجد میں ایک بڑے اجتماع سے خطاب کیا ہے۔ حقانی نے عوام کی ثابت قدمی کی تعریف کرتے ہوئے پاکستان سے بدلہ لینے کا اعلان کیا pic.twitter.com/pWi6SqlSNw
— افغان اردو (@AfghanUrdu) February 27, 2026
“नक्शा बदलने” की धमकी
रिपोर्ट्स के अनुसार, हक्कानी ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अगर अफगानिस्तान ने उसी तरह जवाब दिया जैसा उसने पहले बाहरी ताकतों के खिलाफ दिया था, तो हालात पाकिस्तान के लिए बेहद मुश्किल हो सकते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि एक दिन का युद्ध भी क्षेत्रीय समीकरण बदल सकता है. यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को और गंभीर बनाता है.
आसिम मुनीर को दी नसीहत
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम लेते हुए हक्कानी ने उन्हें इतिहास से सबक लेने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान ने अपने लंबे संघर्ष और बलिदान के जरिए विदेशी ताकतों से स्वतंत्रता हासिल की है. ऐसे में किसी भी तरह की आक्रामक नीति का जवाब भी उसी दृढ़ता से दिया जा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पिछली गलतियों से सीख नहीं ली गई, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
सीमा पर बढ़ा टकराव
इस बयान के साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में दोनों देशों के बीच सीमा पर हमलों की खबरें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की ओर जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद पाकिस्तान ने काबुल और कंधार में हवाई हमले किए. इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से हमलों का सिलसिला तेज हो गया है और अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं.
स्थिति बनी हुई है संवेदनशील
मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर हैं. बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों के चलते क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है. यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है.
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