यूक्रेन की कमजोर नस पर रूस का भीषण वार, जेलेंस्की की उड़ी नींद, जानें क्या है मॉस्को की रणनीति

Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों और दूसरे ठिकानों पर लगातार हमलों के बाद रूस ने भी कीव के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

Kyiv Russia rains drones on South Bridge major strike on Ukraine lifeline
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Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों और दूसरे ठिकानों पर लगातार हमलों के बाद रूस ने भी कीव के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. 

1 और 2 अक्टूबर को रूसी ड्रोन ने कीव के साउथ ब्रिज पर कई बार हमला किया. इसके बाद ब्रिज को यातायात के लिए बंद करना पड़ा और शहर में ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई.

रूस ने यूक्रेन की किस कमजोर नस पर किया अटैक?

रूसी ड्रोन हमलों का निशाना कीव का साउथ ब्रिज बना. यह ब्रिज नीपर नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों में से एक है. हमले के बाद ब्रिज के सपोर्ट स्ट्रक्चर, सड़क और मेट्रो से जुड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई. कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि हमलों के बाद ब्रिज को वाहनों और मेट्रो के लिए बंद कर दिया गया.

‘साउथ ब्रिज’ पर स्ट्राइक: कीव की आवाजाही पर बड़ा असर

नीपर नदी की वजह से कीव शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ है और दोनों तरफ आने-जाने के लिए पुल बेहद जरूरी हैं. साउथ ब्रिज भी इन्हीं प्रमुख रास्तों में शामिल है. इस ब्रिज से सड़क यातायात के साथ मेट्रो भी गुजरती है. इसलिए इसके बंद होने का सीधा असर शहर की रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ा.

रूसी हमलों के बाद कीव के दूसरे पुलों पर भी यातायात को सीमित किया गया. इससे राजधानी में कई जगह लंबा जाम लग गया और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा.

मेयर ने बताया शहर का हाल, ‘स्थिति बेहद गंभीर’

हमलों के बाद कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने शहर की सुरक्षा को लेकर बैठक की. उन्होंने स्थिति को बेहद गंभीर बताया. साउथ ब्रिज के अलावा दूसरे पुलों पर भी यातायात प्रतिबंध लगाए गए, जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया.

रूस की ओर से हाल के दिनों में यूक्रेन के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर ड्रोन हमले तेज किए गए हैं. कीव में पुलों के अलावा डेटा सेंटर और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं. इससे यूक्रेन के लिए आने वाली सर्दियों में बिजली और दूसरी जरूरी सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है.

पुतिन का नया रुख, सर्दियों से पहले बढ़ा दबाव

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हवाई हमलों पर लगी कुछ पुरानी सीमाओं को हटाने का आदेश दिया है. इसके बाद रूस की ओर से यूक्रेन के अहम ठिकानों पर हमले बढ़े हैं. 

रूस हालांकि इन हमलों को सैन्य जरूरतों और यूक्रेन के सैन्य इस्तेमाल वाले ठिकानों को निशाना बनाने के तौर पर पेश करता रहा है. ऐसे समय में जब सर्दियां आने वाली हैं, यूक्रेन के पावर ग्रिड और दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले कीव के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं.

खारकीव से लेकर रिहायशी इलाकों तक हमले

रूसी हमले सिर्फ कीव तक सीमित नहीं रहे. खारकीव में भी रूसी गाइडेड बम हमले की खबर सामने आई, जिसमें लोगों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई. कीव में एक बहुमंजिला इमारत भी रूसी हमले की चपेट में आई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए.

इन हमलों से साफ है कि रूस और यूक्रेन के बीच हवाई हमलों का सिलसिला लगातार तेज हो रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर शहरों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ रहा है.

जेलेंस्की का पलटवार, रूस की तेल सुविधाएं बनीं निशाना

दूसरी ओर यूक्रेन भी रूस पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेनी सेना ने रूस के समारा और वोल्गोग्राड क्षेत्रों में तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया. रूस के कई औद्योगिक और ऊर्जा ठिकाने भी यूक्रेनी ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं.

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन के तेल और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए ड्रोन हमलों से रूस को उसकी जीडीपी का करीब 1 प्रतिशत नुकसान हुआ है. रूस में इन हमलों के बाद ईंधन सप्लाई पर भी दबाव बढ़ा है.

क्या अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले बनेंगे युद्ध का नया मोर्चा?

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में अब सिर्फ सैनिक ठिकाने ही निशाने पर नहीं हैं. पुल, तेल रिफाइनरी, बिजली से जुड़े ठिकाने, डेटा सेंटर और दूसरे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर भी हमलों का हिस्सा बनते जा रहे हैं.

रूस का कहना है कि वह यूक्रेन के सैन्य इस्तेमाल वाले ठिकानों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े स्थानों को निशाना बना रहा है. वहीं यूक्रेन का कहना है कि रूस के हमलों से उसके शहरों और जरूरी नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंच रहा है. ऐसे में साउथ ब्रिज पर हुए हमले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब इंफ्रास्ट्रक्चर भी बड़े निशाने बन चुके हैं.

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