आर्मी बेस, फाइटर जेट से एयर डिफेंस तक... चिकन नेक पर सुरक्षा कवच बना रहा भारत, टेंशन में बांग्लादेश!

भारत बांग्लादेश से लगी सीमा पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा है. इसके तहत सीमा के पास सैन्य ठिकानों, आधुनिक निगरानी तकनीक और हवाई सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

भारत बांग्लादेश से लगी सीमा पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा है. इसके तहत सीमा के पास सैन्य ठिकानों, आधुनिक निगरानी तकनीक और हवाई सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, भारत पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहा है. खास तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा भारत के लिए अहम है. इन तैयारियों के बीच बांग्लादेश की चिंता को लेकर भी चर्चा हो रही है.

सूत्रों के मुताबिक, नवंबर 2025 में भारतीय सेना ने तीन सैन्य ठिकाने बनाने की योजना पर काम किया था. इनमें असम के धुबरी जिले का बामुनी, बिहार का किशनगंज और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले का चोपड़ा शामिल हैं.

धुबरी में लाचित बरफुकन मिलिट्री स्टेशन

असम के धुबरी में स्थित इस सैन्य स्टेशन की दूरी बांग्लादेश की सीमा से करीब 30 से 40 किलोमीटर बताई जाती है. सूत्रों के मुताबिक, यहां 1,200 से 1,500 सैनिकों को रखने की क्षमता है. इससे इस क्षेत्र में सेना की मौजूदगी और निगरानी मजबूत हो सकती है.

चोपड़ा फॉरवर्ड बेस

पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में बना यह सैन्य ठिकाना बांग्लादेश की सीमा से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास होने के कारण इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है.

किशनगंज फॉरवर्ड बेस

बिहार के किशनगंज में स्थित यह ठिकाना जरूरत पड़ने पर सैनिकों को तेजी से तैनात करने और सैन्य सामान पहुंचाने में मदद कर सकता है. सूत्रों के अनुसार, भारत मिजोरम के लांगतलाई जिले में परवा गांव के पास भी एक सैन्य ठिकाना बनाने पर विचार कर रहा है. यह इलाका भारत, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाओं के करीब है.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर खास ध्यान

भारत की सुरक्षा रणनीति में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की अहम भूमिका है. करीब 22 किलोमीटर चौड़ा यह संकरा रास्ता भारत के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर के सात राज्यों से जोड़ता है. इसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है.

इस रास्ते से पूर्वोत्तर तक सैनिकों, जरूरी सामान और अन्य संसाधनों को पहुंचाया जाता है. ऐसे में इसकी सुरक्षा मजबूत रखना भारत के लिए जरूरी है. यहां बेहतर सैन्य व्यवस्था होने से जरूरत पड़ने पर सैनिकों की तैनाती तेजी से की जा सकती है.

AI और ड्रोन से सीमा पर निगरानी

भारत सीमा की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (BSF) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कमांड सेंटर और निगरानी प्रणालियों की मदद से सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रख रहा है.

थर्मल कैमरों वाले ड्रोन, ड्रोन को रोकने वाले सिस्टम और रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर जैसी तकनीकें भी सुरक्षा मजबूत करने में मदद करती हैं.

भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा है. इसमें से लगभग 3,240 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ लगाई जा चुकी है. इतनी लंबी सीमा पर लगातार नजर रखना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है.

राफेल और S-400 से हवाई सुरक्षा मजबूत

भारत पूर्वी क्षेत्र में हवाई सुरक्षा पर भी ध्यान दे रहा है. पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर राफेल लड़ाकू विमानों का स्क्वाड्रन पहले से तैनात है.

सूत्रों के मुताबिक, सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, भारत और इजरायल के सहयोग से विकसित मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (MRSAM) और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की मौजूदगी की भी संभावना है. इनका इस्तेमाल मिसाइलों, ड्रोन और दूसरे संभावित हवाई खतरों से अहम ठिकानों की रक्षा के लिए किया जाता है.

सूत्रों का यह भी कहना है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास सैन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए भूमिगत भंडारण और रॉकेट सिस्टम से जुड़े ढांचे विकसित किए जा रहे हैं.

बांग्लादेश में गिरा BSF का ड्रोन

5 मई को बांग्लादेश के ललमनिरहाट जिले के पाटग्राम इलाके में मोगलबाड़ी सीमा के पास BSF का एक ड्रोन गिर गया था. सूत्रों के मुताबिक, यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 10 से 20 गज अंदर मिला था. इसके बाद बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल (BGB) ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था. इस घटना के बाद सीमा पर ड्रोन निगरानी और तकनीक के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हुई.

बांग्लादेश भी बढ़ा रहा निगरानी क्षमता

भारत के साथ-साथ बांग्लादेश भी अपनी सीमा निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बना रहा है. सूत्रों के मुताबिक, BGB ने निगरानी के लिए अलग-अलग तरह के ड्रोन और हाथ से इस्तेमाल होने वाले एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल किए हैं. ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए एक नया स्कूल भी शुरू किया जा रहा है.

इसके अलावा, बांग्लादेश के ललमनिरहाट एयरबेस को फिर से सक्रिय करने को लेकर भी चर्चा है.

क्या भारत की तैयारियों से बांग्लादेश की चिंता बढ़ी?

भारत की ओर से सीमा के पास सैन्य ठिकानों और सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या इससे बांग्लादेश की चिंता बढ़ रही है. भारत के लिए इन तैयारियों का मुख्य मकसद सीमा की सुरक्षा, पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क बनाए रखना और अहम सैन्य ठिकानों की रक्षा करना है.

हालांकि, बांग्लादेश की चिंता बढ़ने को लेकर कोई ठोस पुष्टि सामने नहीं है. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर की सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहा है. नए सैन्य ठिकाने, ड्रोन से निगरानी, राफेल लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम इस तैयारी का हिस्सा हैं.