इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में दोहा में हुए एक विवादास्पद सैन्य हमले को लेकर कतर के प्रधानमंत्री से औपचारिक माफी मांगी है. यह कॉल अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस से की गई थी, जब नेतन्याहू वहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर रहे थे.
इस हमले में हमास के वरिष्ठ सदस्य खलील अल-हय्या के बेटे और उनके करीबी जिहाद लबाद समेत कुल पांच लोग मारे गए थे. माना जा रहा है कि इस कार्रवाई ने न सिर्फ कतर-इज़रायल संबंधों में खटास डाली है, बल्कि अमेरिका के साथ भी तनाव का कारण बनी है.
अमेरिका को भी नहीं थी भनक, ट्रंप ने जताई नाराजगी
दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर इज़राइल द्वारा किया गया यह हमला अमेरिकी प्रशासन को बिना बताए अंजाम दिया गया था. इस बात को लेकर व्हाइट हाउस में खासी नाराज़गी देखी गई. सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को फटकार लगाई, और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से पहले अमेरिका को भरोसे में लेना चाहिए. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह का हमला क्षेत्रीय कूटनीति को नुकसान पहुंचा सकता है और शांति प्रयासों पर पानी फेर सकता है.
कतर ने हमले को बताया ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’
कतर, जो गाजा युद्धविराम वार्ता में एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने इस हमले को लेकर इज़राइल की तीखी आलोचना की. दोहा सरकार ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई कायरता भरी थी और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. कतर के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि इस प्रकार की घटनाएं मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले देशों के लिए भी जोखिम भरी स्थिति पैदा कर सकती हैं.
हमास ने अमेरिका को भी ठहराया जिम्मेदार
हमले के बाद हमास ने प्रतिक्रिया देते हुए इज़राइल के साथ-साथ अमेरिका को भी जिम्मेदार ठहराया. संगठन ने कहा कि यह हमला एक साझा षड्यंत्र का हिस्सा है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से उनके वार्ता के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा. बयान में कहा गया, "इज़राइल का यह प्रयास विफल रहा है."
नेतन्याहू की चेतावनी और कतर का जवाब
माफी के बावजूद, नेतन्याहू ने कतर को चेतावनी दी कि वह हमास के नेताओं को या तो देश से बाहर निकाले या उन्हें कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाए. इसके जवाब में कतर सरकार ने नेतन्याहू की इस टिप्पणी को गैर-ज़िम्मेदाराना और उकसावे भरी करार दिया.
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