तेहरान/यरूशलम: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं को दोगुनी रफ्तार से बढ़ा रहा है और अब वह ऐसी स्थिति में है कि अगर युद्ध छिड़ता है, तो इजरायल पर एक साथ दो हजार तक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें दाग सकता है. यह जानकारी अमेरिकी और यूरोपीय खुफिया एजेंसियों से मिली है, जिन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में “पूर्ण युद्ध की संभावना पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है.”
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में अमेरिका द्वारा किए गए कथित साइबर और हवाई हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नुकसान तो पहुंचा, लेकिन वह पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास अभी भी इतना समृद्ध यूरेनियम है जिससे कम से कम 10 से 11 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं.
2015 में किया गया परमाणु समझौता समाप्त
ईरान पर 2015 में किया गया परमाणु समझौता (JCPOA) पिछले महीने समाप्त हो चुका है और इसके नवीनीकरण पर किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं चल रही. ऐसे में पश्चिमी देशों और इजरायल दोनों को आशंका है कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को अब सैन्य दिशा में ले जा रहा है.
24 घंटे चल रहे मिसाइल कारखाने
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ अली वाएज ने चेतावनी दी है कि ईरान में इस वक्त मिसाइल उत्पादन संयंत्र 24 घंटे काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "ईरान अब सिर्फ रक्षात्मक तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि वह इजरायल पर एक साथ 2000 मिसाइलें दागने की स्थिति में खुद को तैयार कर रहा है. इतनी संख्या में मिसाइलें कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम एक साथ रोक नहीं सकता."
अली वाएज के अनुसार, ईरान की रणनीति है कि पहले ही हमले में इजरायल के मुख्य सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय कर दिया जाए.
पिकऐक्स माउंटेन- ईरान का नया परमाणु केंद्र
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में ‘पिकऐक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) नामक नए यूरेनियम संवर्धन केंद्र का निर्माण शुरू किया है. यह केंद्र पहाड़ों के भीतर बनाया जा रहा है ताकि अमेरिकी या इजरायली बमबारी से सुरक्षित रह सके.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को अभी तक इस स्थान तक पहुंच की अनुमति नहीं दी गई है. सूत्रों का कहना है कि यहां अत्याधुनिक सेंट्रीफ्यूज मशीनें लगाई गई हैं जो पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में चार गुना तेजी से संवर्धन कर सकती हैं.
चीन से मिसाइल ईंधन की मदद
सीएनएन की एक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन ने हाल के महीनों में ईरान को सोडियम पर्क्लोरेट की 10 से 12 खेपें (लगभग 2000 टन) भेजी हैं. यह रासायनिक पदार्थ सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों के निर्माण में एक मुख्य घटक है.
यूरोपीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन खेपों से ईरान सैकड़ों नई मिसाइलें तैयार कर सकता है. इजरायल ने चीन से इन आपूर्तियों को रोकने की मांग की है, लेकिन बीजिंग का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के उल्लंघन में नहीं आता.
जून के युद्ध से सीखे गए सबक
इजरायली मीडिया Ynetnews के मुताबिक, जून में हुए संघर्ष के दौरान ईरान ने इजरायल पर करीब 500 मिसाइलें दागी थीं, जिनमें से लगभग 10% मिसाइलें आयरन डोम सिस्टम से नहीं रोकी जा सकीं.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान अगली बार 2000 से ज्यादा मिसाइलें एक साथ लॉन्च करता है, तो इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम ओवरलोड हो जाएगा और बड़ी संख्या में मिसाइलें अपने लक्ष्यों तक पहुंच जाएंगी.
इजरायल के एक रक्षा अधिकारी ने कहा, "हमें अब एक अलग स्तर के खतरे का सामना करना पड़ रहा है. ईरान की मिसाइलें अब ज्यादा तेज, सटीक और दूर तक मार करने वाली हैं."
IAEA ने जताई गंभीर चिंता
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने हाल ही में फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा, "ईरान के अधिकांश यूरेनियम भंडार अमेरिकी हमले में नष्ट नहीं हुए हैं. देश के पास अभी भी 400 किलोग्राम यूरेनियम है जो 60% तक संवर्धित है, यानी यह परमाणु बम निर्माण के बेहद करीब है."
IAEA ने ईरान से तत्काल नए निरीक्षण की अनुमति मांगी है, लेकिन तेहरान सरकार ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
ईरान में सत्ता के दो गुट
तेहरान के राजनीतिक गलियारों में अब दो खेमे बन चुके हैं —
हालांकि, दोनों खेमे इस बात पर सहमति रखते हैं कि इजरायल के साथ टकराव अब अपरिहार्य है.
ये भी पढ़ें- बूंद-बूंद को तरस रहा ईरान, राजधानी करना पड़ सकता है खाली, सांसद महिलाओं को बताया सूखे का जिम्मेदार