विकसित भारत 2047 के लिए क्या होगी पुलिस की भूमिका? स्पेशल CP क्राइम देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने दिया जवाब

भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में दिल्ली स्पेशल सीपी क्राइम देवेश चंद्र श्रीवास्तव शामिल हुए. भारत 24 के मंच से उन्होंने कानून व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के बेबाकी से जवाब दिए. 

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नई दिल्ली: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में दिल्ली स्पेशल सीपी क्राइम देवेश चंद्र श्रीवास्तव शामिल हुए. भारत 24 के मंच से उन्होंने कानून व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के बेबाकी से जवाब दिए. 

सवाल: हम बात कर रहे हैं विकसित भारत 2047 और कहा जाता है कि अगर कोई भी राष्ट्र विकसित हो उसके लिए सुरक्षा भरोसा बहुत ज्यादा जरूरी होता है. ऐसे में विकसित राष्ट्र के लिए पुलिस की भूमिका क्या होगी?

जवाब: देखिए बड़ा वैलिड आपने सवाल पूछा है. कोई भी अगर हम विकास चाहते हैं तो सबसे पहले उसके लिए सुरक्षा जो है वो प्रीरिक्विजिट है. तो जो आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी है वो पुलिस की रहती है. लॉ एंड ऑर्डर की चाहे ट्रैफिक मैनेजमेंट हो चाहे वीवीआईपी सिक्योरिटी हो. तो हर तरह की जो सुरक्षा के लिए जो केंद्र शासित प्रदेश हैं या राज्य हैं उनके पुलिस बल तैनात रहते हैं और हम लोगों की यह एक हमेशा यह कोशिश रहती है कि जो विकसित भारत में जो यह कल्पना की गई है कि सबसे पहले सुरक्षित भारत हो और उसके बाद विकसित भारत हो तो उसके लिए हम लोग पूरी तरह से प्रयत्नशील हैं. 

सवाल: किसी भी देश के विकास में कहा जाता है कि सबसे बड़ी भूमिका निवेश की होती है, निवेशकों की होती है, उद्योग की होती है. लेकिन सर उनके ज़हन में सबसे बड़ा मुद्दा अपनी सुरक्षा होता है. तो ये कैसे सुनिश्चित आप लोग कर रहे हैं कि यहां पर निवेशक आए निवेश करें. 

जवाब: अगर आप राज्यों की बात करें तो आप देखेंगे कि जहां पे अच्छी आंतरिक सुरक्षा है, अच्छी लॉ एंड ऑर्डर है वहां पर निवेश भी आता है, वहां पे उद्योग भी पनपता है. और मैं दिल्ली पुलिस के परिपेक्ष में बात करूं तो अगर दिल्ली पुलिस के लिए मैं कहूं तो देश भर की पुलिस फोर्स में तो सर्वश्रेष्ठ गिनी ही जाती है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पुलिस की प्रोफेशनलिज्म को माना जाता है. इतने जो वीआईपी विजिट्स होते हैं, बाहर के डिग्निटरीज विजिट करते हैं. इतने लॉ एंड ऑर्डर यहां पर क्रिएट होते हैं, डेमोंस्ट्रेशंस होते हैं. और जो क्राइम है, वह भी काफी कंट्रोल किया हुआ है. ट्रैफिक मैनेजमेंट है. और जो खासतौर पर जो वनरेबल सेक्शंस हैं, चाहे वो महिलाएं कहिए, चाहे एससी एसटी वर्ग कहिए, चाहे बच्चे कहिए, चाहे सीनियर सिटीजंस कहिए, चाहे नॉर्थ ईस्ट के रेजिडेंट्स कहिए. सबके लिए हमने यह सुनिश्चित किया है कि उनके लिए खासतौर पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाए. तो हमारा कोशिश यही रहेगा कि दिल्ली पुलिस एक सुरक्षित सेफ और सिक्योर दिल्ली दे जहां पर देश भर से ही नहीं बट बाकी पूरे विदेशों से और हर जगह से लोग आ सके और यहां के रेजिडेंट्स भी अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके. 

सवाल: दिल्ली देश की राजधानी है और ऐसे में समय-समय पर सर हम लॉरेंस बिश्नोई, रोहित गुदारा की अगर बात कर लें नाम सुर्खियों में आते हैं. यह लोगों को डराने की कोशिश करते हैं. सर यह कितना बड़ा चैलेंज होता है और इस चैलेंज से निपटना आप लोगों की कैसी इसमें स्ट्रेटजी रहती है?

जवाब: जहां तक गैंगस्टर्स की बात है मैं यह बात कहूंगा कि आप लोग आए दिन अखबारों में भी पढ़ते हैं और टीवी में भी देखते हैं तो गैंगस्टर्स पर हमारा काफी अच्छा कंट्रोल है और जो बाहर से जो लोग बैठे हुए हैं का बाकी एजेंसियों के साथ मिलके भी हम कोशिश कर रहे हैं कि उनको भी पकड़ा जाए. उनको भी भारत वापस लाया जाए. लेकिन कुल मिलाकर मैं कहूंगा कि चाहे हमारी स्पेशलाइज यूनिट्स हैं, स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच हैं. चाहे जिलों के पुलिस है. सब लोग एक इफेक्टिव हम लोग कंट्रोल कर रहे हैं. और इसके अलावा जो साइबर क्राइम्स हैं वो भी एक हमारी प्रायोरिटी है दोनों तरह से कि हमने ऑपरेशन सहा हॉक के भी तीन वर्जनंस लॉन्च किए पिछले तीन महीनों में और उसके अलावा अवेयरनेस की भी हम कोशिश कर रहे हैं. तीसरा जो ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई है जो माननीय उपराज्यपाल महोदय का एक था कि ड्रग फ्री दिल्ली बाय 2027 का जो विज़न है उसमें भी हम लोग अह सप्लाई डिसरप्शन और डिमांड रिडक्शन दोनों जो पहलू हैं उस पर काम कर रहे हैं. 

सवाल: सर एक इसमें महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी आ जाता है और अभी इंटरनेशनल वुमस डे भी हम लोगों ने सेलिब्रेट किया है. सर मैं ये जानना चाहूंगी क्योंकि जो महिला सुरक्षा का मुद्दा है और महिलाएं सुरक्षित रहें खासतौर पर राजधानी में क्योंकि देश भर से इसमें महिलाएं आती हैं. क्या ठोस कदम आप लोग उठाते हैं कैसे यह सुनिश्चित किया जाए क्योंकि सर हर दिन हम देखते हैं क्राइम रीड सामने तो आ ही रहे हैं. 

जवाब: जहां तक महिलाओं की बात है मैं यह सबसे पहले भरोसा दिलाना चाहूंगा कि वो पूरी तरह सुरक्षित है. अगर हम क्राइम फिगर्स की बात करें तो पिछले साल अह जो है हमने लगभग 14% से ज़्यादा की गिरावट देखी जो क्राइम अगेंस्ट वुमेन है और हमारी कई जो कम्युनिटी पुलिसिंग में भी दिल्ली पुलिस काफी अग्रणी है और हम लोगों की स्कीम्स जैसे सशक्ति है उसमें अभी तक हम लोग 27 लाख महिलाओं और बच्चियों को सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग में प्रशिक्षित कर चुके हैं और लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी इसका नाम अंकित है. इसके अलावा जो हमारी बच्चियों को शुरू से सिखाने की है, उसमें निर्भीक है, नाजुक है. हमारी परिवर्तन की स्कीम है जिसमें हम झुग्गी झोपड़ी क्लस्टर में जाते हैं. तो कुल मिला के जो महिलाओं को इंक्लूसिव है. हमारे यहां पिछले 7 साल से महिलाओं का जो नए रिक्रूटमेंट होते हैं उसमें 33% रिजर्वेशन है. तो आज की डेट में लगभग 18% जो हमारा पुलिस बल है वह महिला हैं और हमें उम्मीद है कि अगले 5 साल में बढ़ के यह 25% तक पहुंच जाएगा और पिछले 7 सालों से हम लोग 33% रिजर्वेशन के साथ काम करते हैं. तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए हम लोग प्रोएक्टिव मेजर्स भी लेते हैं और इसके साथ-साथ यह भी देखते हैं कि अगर कोई अपराध होता भी है तो उसको भी हम लोग जल्दी से जल्दी उस पर कारवाई कर सकें और ये जो अपराधी हैं उन्हें पकड़ सके और उन्हें कड़ी से कड़ी सजाई दिलाया जा सके. 

सवाल: हमने सोशल मीडिया पर देखा कि किस तरीके से कुछ ऐसी खबरें चल रही थी कि महिलाएं और बच्चियां खासतौर पर मिसिंग हो रही हैं. लेकिन फिर इस तरह की भी जानकारी आई कि रमर्स थे. सर जब इस तरह की इंफॉर्मेशन हम देखते हैं रमर्स जो फैलते हैं मिसअंडरस्टैंडिंग हो जाती है. इससे आप लोग कैसे निपटेंगे? आजकल हम देखते हैं सोशल मीडिया का जमाना एक खबर चली और वो वायरल हो जाती है. तो ये कितना बड़ा चैलेंज होता है? 

जवाब: यह एक बड़ा चैलेंज है लेकिन हम लोगों का मैं परसेप्शन मैनेजमेंट एंड मीडिया सेल भी देखता हूं क्राइम के साथ-साथ तो हम लोग सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग भी करते हैं और आपने देखा होगा पिछली कुछ समय में मीडिया पर हमने सोशल मीडिया पर जो हैं उनके खिलाफ कारवाई की जो कि चाहे गन पकड़े हुए थे चाहे गलत गैर कानूनी हरकत कर रहे थे तो सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग की जाती है और मैं भी उनकी बात को दोहराना चाहूंगा कि जो युवा वर्ग है सोशल मीडिया को रिस्पांसिबबली यूज करें उस पे ब्लाइंडली फेथ नहीं करें और चीजों को हमेशा फैक्ट चेक करें और सोशल मीडिया जो है वो एक इसमें पॉजिटिव भी है लेकिन इसकी नेगेटिव साइड भी है. उस साइड से उस दुष्प्रभाव से बचाने के लिए भी हम लोग लगातार वार्निंग भी देते रहते हैं और साइबर सेफ्टी के अपने अभियान भी चलाते रहते हैं. 

सवाल: तिहाड़ जेल का भी एडिशनल चार्ज आपने संभाला. सर हाउ वास योर एक्सपीरियंस देयर?

जवाब: एक एक महीने से कम का ये समय था लेकिन एक अच्छा पर्सनली मैं कहूं एक अच्छा अनुभव रहा. काफी कुछ जो पुलिस के बियोंड भी मुझे देखने को मिला और यहां की तिहाड़ जेल ना केवल देश की बल्कि विश्व की बहुत अच्छी मैनेज जेलों में जानी जाती है और काफी अच्छे काम हो रहे हैं चाहे रिहबिलिटेशन के उनके जो कैदी हैं उनको रीइीग्रेशन करने के. तो मेरा यही प्रयास था और आगे भी यही प्रयास रहेगा कि इस तरह की जो पुलिस और जेल में जो तालमेल है वो भी जारी रहे और जेलों में इसी तरह अच्छा काम होता रहे. 

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