चीन से J-10C फाइटर जेट खरीदेगा भारत का यह पड़ोसी मुस्लिम देश, 75 हजार करोड़ में लेगा 42 विमान

इंडोनेशिया, जो दुनिया में मुस्लिम आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा देश है, अब अपने सैन्य बेड़े को उन्नत करने की दिशा में चीन के साथ एक अहम रक्षा समझौते की ओर बढ़ रहा है.

Indonesia to buy J-10C fighter jets from China
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जकार्ता: इंडोनेशिया, जो दुनिया में मुस्लिम आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा देश है, अब अपने सैन्य बेड़े को उन्नत करने की दिशा में चीन के साथ एक अहम रक्षा समझौते की ओर बढ़ रहा है. ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया जल्द ही चीन से 42 J-10C मल्टीरोल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है. यह सौदा इसलिए भी खास है क्योंकि यह इंडोनेशिया का पहला गैर-पश्चिमी सैन्य विमान खरीद सौदा होगा.

अब तक इंडोनेशिया ने अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे पश्चिमी देशों पर ही भरोसा किया है. लेकिन अब चीन के साथ हो रही यह संभावित डील उसकी रणनीतिक सोच में बदलाव का संकेत देती है.

रक्षा मंत्री ने की पुष्टि

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सजाफरी सजामसोएदीन ने राजधानी जकार्ता में मीडिया से बातचीत के दौरान इस संभावित खरीद की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि देश की सेना के आधुनिकीकरण की योजना के तहत यह कदम उठाया जा रहा है और बहुत जल्द चीनी लड़ाकू विमान इंडोनेशियाई आसमान में उड़ान भरते नजर आएंगे. हालांकि उन्होंने डील की समयसीमा, विमान की डिलीवरी, और भुगतान संरचना को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की.

बजट को मिली मंजूरी

इस डील की चर्चा पिछले महीने उस समय तेज हो गई थी जब इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल फ्रेगा वेनास ने बताया था कि J-10C विमानों की खरीद पर विचार किया जा रहा है. अब इंडोनेशियाई वित्त मंत्री पुरबया सादेवा ने औपचारिक रूप से पुष्टि की है कि इस विमान सौदे के लिए 9 अरब अमेरिकी डॉलर के बजट को स्वीकृति दे दी गई है.

इंडोनेशिया की वायुसेना के पास वर्तमान में अमेरिकी F-16, रूसी Su-27/30 और ब्रिटिश Hawk जैसे विभिन्न देशों के लड़ाकू विमान हैं. इनमें से कई अब पुराने हो चुके हैं और उनकी जगह आधुनिक विमानों की जरूरत महसूस की जा रही है. ऐसे में J-10C जैसे अत्याधुनिक विमान इस आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम हो सकते हैं.

चीन का वैश्विक सैन्य विस्तार

J-10C चीन का एक उन्नत सिंगल-इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ग्रुप ने विकसित किया है. इसका डिजाइन डेल्टा विंग और कैनार्ड कॉन्फ़िगरेशन पर आधारित है, जिससे यह जेट उच्च गति और बेहतरीन एरोडायनामिक नियंत्रण क्षमता प्रदान करता है. इसकी अधिकतम गति मैक 1.8 तक जाती है और यह मॉर्डन AESA रडार, मेट्योर जैसी मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस होता है.

J-10C को चीन ने पहले पाकिस्तान को बेचा था, जहां यह पाकिस्तानी वायुसेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. पाकिस्तान के पास फिलहाल करीब 20 J-10C विमान हैं, और इन्हें भारत के साथ संभावित टकराव की स्थिति में इस्तेमाल किया गया है. विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान ने इन विमानों को भारत के राफेल जेट से मुकाबले के लिए शामिल किया था.

अब चीन, वेनेजुएला जैसे अन्य देशों को भी ये विमान बेचने के प्रयास में है. वेनेजुएला की सरकार ने संकेत दिया है कि वह भी J-10C विमानों की खरीद पर विचार कर रही है, हालांकि अभी तक किसी समझौते की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है.

राष्ट्रपति प्रबोवो की सैन्य रणनीति

इंडोनेशिया के रक्षा आधुनिकीकरण की यह प्रक्रिया राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के नेतृत्व में तेज़ी से आगे बढ़ रही है. वे सेना के हर हिस्से को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं. प्रबोवो ने बीते समय में चीन, रूस, अमेरिका, तुर्की और फ्रांस जैसे देशों की यात्राएं की हैं और वहां से उन्नत सैन्य तकनीकों और हथियार प्रणालियों की खरीद पर काम किया है.

इन पहलों के तहत इंडोनेशिया ने सर्विलांस सिस्टम, तटीय रक्षा, एयर डिफेंस सिस्टम, पनडुब्बियां और अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. चीन से J-10C की संभावित खरीद इस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिससे देश की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा.

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