वॉशिंगटन: भारतीय सैन्य और रणनीतिक परिदृश्य में हाल के वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. विशेषकर पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद की ऑपरेशन सिंदूर के बाद, भारत की सैन्य रणनीति में संयम पर आधारित परंपरागत दृष्टिकोण की जगह सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई की रणनीति ने ले ली है. अमेरिकी सैन्य विश्लेषक जॉन स्पेंसर और लॉरेन डेगन एमॉस के मुताबिक, यह बदलाव केवल एक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि भारत की नई सैन्य डॉक्ट्रिन का स्थायी हिस्सा बन चुका है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद रणनीतिक बदलाव
जॉन स्पेंसर और लॉरेन डेगन ने लिखा है कि भारत पहले सीमित कार्रवाई और प्रत्युत्तर पर भरोसा करता था. हालांकि, पिछले वर्षों में सीमा पार आतंकवाद और बार-बार हुए हमलों ने यह दिखा दिया कि सीमित जवाब आतंकवाद को रोकने में असफल रहा.
ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब प्रत्येक गंभीर आतंकी हमले को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि युद्ध की घटना मानता है. ऑपरेशन में इस्तेमाल तकनीकें जैसे लंबी दूरी की सटीक फायरिंग, ड्रोन स्वॉर्म ऑपरेशन और रियल-टाइम इंटेलिजेंस दिखाती हैं कि भारत अब पूर्व-योजना के साथ निर्णायक सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
स्पेंसर और एमॉस के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी संकेत दिया कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंजूरी या लंबी जांच प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करता, बल्कि तत्काल कार्रवाई करने की क्षमता रखता है.
नागरिक सुरक्षा और कार्रवाई का नया सिद्धांत
विशेषज्ञों ने यह भी लिखा कि भारत की नई रणनीति में नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है. यदि नागरिकों पर गंभीर आतंकी हमला होता है, तो भारत अपने पहले प्रहार करने के अधिकार को सुरक्षित रखता है. यह दृष्टिकोण अब नीति का हिस्सा बन चुका है और इसे केवल ऑपरेशन सिंदूर तक सीमित नहीं रखा जा सकता.
— John Spencer (@SpencerGuard) November 21, 2025
ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी दिखाया कि भारत अब नागरिक सुरक्षा और सैन्य जवाबी कार्रवाई को एकीकृत तरीके से देखता है, जिससे आतंकवाद को फैलने से पहले नियंत्रित किया जा सके.
पाकिस्तान के साथ सीमित संयम का अंत
स्पेंसर और एमॉस ने लिखा कि भारत की पहले की रणनीति जो पाकिस्तान के साथ तनाव को कम करने के लिए संयम पर आधारित थी कारगर साबित नहीं हुई. पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों ने इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया. सीमित जवाब देने की रणनीति ने आतंकवादियों को विश्वास दिलाया कि वे सीमा पार अपराध कर सकते हैं, जबकि भारत कोई बड़ा जवाबी हमला नहीं करेगा.
लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की नई रणनीति ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब इवेंट-बेस्ड जवाब की बजाय पैटर्न-बेस्ड रणनीति अपनाएगा. इसका मतलब है कि भारत किसी भी खतरनाक गतिविधि के पैटर्न को पहचानकर पहले से कार्रवाई कर सकता है, बजाय यह देखने के कि हमला कब होगा.
मिलिट्री और पॉलिटिकल रणनीति में बदलाव
विशेषज्ञों के अनुसार, नई डॉक्ट्रिन केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है. इसके तहत भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत में बाहरी दखल को कम करना और सीधे सैन्य कमांडरों के बीच संवाद को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है. इसका उद्देश्य है कि दोनों देशों के टॉप ऑपरेशनल अधिकारी सीधे निर्णय लें और भारत की पैंतरेबाजी की आज़ादी बनी रहे.
2025 के सीजफायर के दौरान भारत ने इसे स्पष्ट कर दिया कि कोई भी बाहरी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी. इसका मतलब है कि भारत अब संकटों को क्षेत्रीय और द्विपक्षीय दृष्टिकोण से नियंत्रित करना चाहता है.
टू-फ्रंट वॉर की तैयारी और चीन को संदेश
स्पेंसर और एमॉस का मानना है कि भारत अब दो मोर्चों पर युद्ध की तैयारी कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई तकनीक और पीएल-15 मिसाइलों के असफल प्रयास ने यह दिखाया कि भारत का प्रतिरोध अब सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है.
विशेषकर, चीन के लिए यह एक अप्रत्यक्ष संदेश है कि भारत अब दो मोर्चों पर युद्ध की तैयारी कर रहा है. भारतीय सेना की लॉन्ग-रेंज फायरिंग क्षमता, ड्रोन ऑपरेशन और इंटेलिजेंस-फ्यूज्ड मिशन यह संकेत देते हैं कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए निर्णायक और स्वतंत्र कार्रवाई करने के लिए तैयार है.
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