Govt Hike Tax: सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और ATF पर बढ़ा दी विंडफॉल टैक्स, क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

Tax Hike On Petrol-Diesel: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. हालांकि, इस फैसले का देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा.

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Tax Hike On Petrol-Diesel: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. युद्ध की आशंकाओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत सरकार ने ईंधन निर्यात से जुड़ी कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है. हालांकि, पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स घटाया गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू ईंधन आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.

डीजल और ATF पर बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर यह टैक्स 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. नई दरें 16 जुलाई 2026 से लागू हो गई हैं. सरकार का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते निर्यातकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभ को संतुलित करने के लिए यह कदम आवश्यक है.

पेट्रोल पर राहत

जहां डीजल और ATF पर टैक्स बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है. इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभिन्न ईंधनों की वैश्विक मांग और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर अलग-अलग रणनीति अपना रही है.

पहले भी बदल चुकी हैं टैक्स दरें

भारत सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती रही है. जुलाई की शुरुआत में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कुछ कम हुआ था और तेल बाजार में स्थिरता आई थी, तब सरकार ने डीजल और ATF पर टैक्स घटाया था, जबकि पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाया गया था. अब एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद सरकार ने कर ढांचे में बदलाव करते हुए डीजल और विमान ईंधन पर टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया है.

क्या आम लोगों के लिए महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसका असर देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा. इसका जवाब फिलहाल नहीं है. विंडफॉल टैक्स सीधे तौर पर ईंधन निर्यात करने वाली कंपनियों पर लगाया जाता है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनियां केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मुनाफे के लिए घरेलू आपूर्ति को प्रभावित न करें. इसलिए इस टैक्स का सीधा असर आम उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंप पर चुकाई जाने वाली कीमतों पर नहीं पड़ता.

चार महानगरों में क्या हैं ताजा ईंधन दरें?

16 जुलाई 2026 को देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.48 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. वहीं चेन्नई में पेट्रोल 107.78 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है.

क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर है, जिसे सरकार तब लागू करती है जब किसी उद्योग या कंपनी को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण असामान्य या अप्रत्याशित मुनाफा होने लगता है. तेल कंपनियों के मामले में इसका मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और निर्यात से होने वाले अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा सरकारी राजस्व के रूप में प्राप्त करना होता है. ऐसे में जब भी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव आता है, सरकार विंडफॉल टैक्स की समीक्षा कर उसकी दरों में बदलाव करती है. इस बार भी अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बढ़ी तेल कीमतों ने सरकार को यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया.