देश में तेजी से बढ़ रही अमीरों की फौज, 5 साल में चार गुना बढ़ी अरबपतियों की संख्या, रिपोर्ट ने चौंकाया

भारत की अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसका असर अब केवल जीडीपी के आंकड़ों या शेयर बाजार की ऊंचाइयों तक सीमित नहीं रह गया है. अब इसकी झलक देश के आयकर आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगी है.

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भारत की अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसका असर अब केवल जीडीपी के आंकड़ों या शेयर बाजार की ऊंचाइयों तक सीमित नहीं रह गया है. अब इसकी झलक देश के आयकर आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगी है. बीते कुछ वर्षों में ऐसे लोगों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जिन्होंने अपनी आयकर रिटर्न (ITR) में सालाना 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सकल आय घोषित की है. यह बदलाव केवल कुछ अमीर लोगों की बढ़ती कमाई की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत में तेजी से हो रहे निवेश, उद्योग, डिजिटल कारोबार और उद्यमिता के विस्तार की तस्वीर भी पेश करता है. हालांकि, इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या संपत्ति का यह तेज़ी से बढ़ता निर्माण समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रहा है या फिर आर्थिक असमानता भी उसी गति से बढ़ रही है.

पांच साल में चार गुना बढ़ा 100 करोड़ आय घोषित करने वालों का आंकड़ा

संसद में पेश किए गए वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक आकलन वर्ष 2025-26 में 576 करदाताओं ने अपनी आयकर रिटर्न में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सालाना सकल आय घोषित की है. यह संख्या पांच वर्ष पहले यानी आकलन वर्ष 2021-22 में केवल 142 थी. इस तरह पांच वर्षों के भीतर इस वर्ग में आने वाले लोगों की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई है.

सरकारी आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी का रुझान दिखाई देता है. आकलन वर्ष 2022-23 में ऐसे करदाताओं की संख्या 205 रही, जो अगले वर्ष बढ़कर 395 हो गई. आकलन वर्ष 2024-25 में यह संख्या 415 तक पहुंची और अब 2025-26 में यह बढ़कर 576 हो गई है. यह लगातार वृद्धि बताती है कि भारत में उच्च आय वर्ग का विस्तार तेजी से हो रहा है.

हाई इनकम टैक्सपेयर्स के आंकड़े

इन आंकड़ों को लेकर अक्सर यह भ्रम पैदा हो सकता है कि सरकार ने देश के अरबपतियों की संख्या बताई है, लेकिन ऐसा नहीं है. वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आयकर कानून में "अरबपति" की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है. सरकार केवल उन लोगों का रिकॉर्ड रखती है जिन्होंने अपनी आयकर रिटर्न में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की वार्षिक सकल आय घोषित की है. 

यानी जिन लोगों की संपत्ति अरबों रुपये की है, उनकी संख्या का आकलन अलग-अलग निजी संस्थाएं अपनी अलग कार्यप्रणाली के आधार पर करती हैं. इसलिए दोनों आंकड़ों की सीधे तुलना करना उचित नहीं माना जा सकता.

शेयर बाजार की तेजी ने बढ़ाई बड़ी कमाई

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. सेंसेक्स और निफ्टी ने लगातार नए रिकॉर्ड बनाए, जिससे सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटर्स, बड़े निवेशकों और शुरुआती शेयरधारकों की संपत्ति में भारी बढ़ोतरी हुई. कई कंपनियों का बाजार पूंजीकरण कई गुना बढ़ा, जिसका सीधा असर उनके मालिकों और निवेशकों की आय पर पड़ा. पूंजी बाजार की इस मजबूती ने बड़ी आय अर्जित करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

स्टार्टअप क्रांति ने तैयार किए नए सुपर रिच

भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है. पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने हैं. इन कंपनियों के संस्थापकों, शुरुआती निवेशकों और कर्मचारियों को ESOP के जरिए भारी आर्थिक लाभ मिला. फिनटेक, सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थ टेक और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते कारोबार ने नई पीढ़ी के उद्यमियों को भी उच्च आय वर्ग में पहुंचाने का काम किया है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना नई कमाई का आधार

सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का असर अब उद्योगों में दिखाई देने लगा है. इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश हुए हैं. इन निवेशों से कंपनियों का उत्पादन बढ़ा, मुनाफा मजबूत हुआ और उद्योगपतियों की आय में भी तेजी आई. यही वजह है कि विनिर्माण क्षेत्र भी अब हाई इनकम ग्रुप तैयार करने वाले प्रमुख सेक्टरों में शामिल हो चुका है.

डिजिटल इकोनॉमी ने बदली कमाई की तस्वीर

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था भी तेजी से विस्तार कर रही है. यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली, डिजिटल बैंकिंग, ई-कॉमर्स, SaaS कंपनियां और एआई आधारित बिजनेस मॉडल ने नए अवसर पैदा किए हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से कारोबार का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ा है. इससे नई कंपनियों और उनके संस्थापकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है.

टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता से बढ़ा वास्तविक आय का खुलासा

हाई इनकम टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़ने का एक कारण केवल कमाई में वृद्धि नहीं है, बल्कि टैक्स अनुपालन में आया सुधार भी है. पिछले कुछ वर्षों में फेसलेस असेसमेंट, पैन-आधार लिंकिंग, डिजिटल डेटा एनालिटिक्स और ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग जैसी व्यवस्थाओं ने आय छिपाने की संभावनाओं को कम किया है. अब अधिक लोग अपनी वास्तविक आय घोषित कर रहे हैं, जिससे उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है.

किन सेक्टरों से निकल रहे हैं सबसे ज्यादा हाई इनकम प्रोफेशनल?

देश में जिन क्षेत्रों ने सबसे अधिक संपत्ति निर्माण किया है उनमें सूचना प्रौद्योगिकी, फिनटेक, फार्मा, रियल एस्टेट, कैपिटल मार्केट, ग्रीन एनर्जी, ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग प्रमुख हैं. इन उद्योगों में लगातार निवेश और बढ़ती मांग ने कंपनियों के साथ-साथ उनके प्रमोटर्स और निवेशकों की आय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.

बढ़ती आय का सरकार को भी सीधा फायदा

जब अधिक लोग बड़ी आय घोषित करते हैं तो सरकार के प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी वृद्धि होती है. अधिक टैक्स कलेक्शन का मतलब है कि सरकार के पास बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण योजनाओं और पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए ज्यादा संसाधन उपलब्ध होते हैं. यानी हाई इनकम टैक्सपेयर्स की बढ़ती संख्या केवल व्यक्तिगत संपत्ति का संकेत नहीं है, बल्कि सरकारी वित्तीय क्षमता को भी मजबूत बनाती है.

भारत तेजी से बन रहा है वेल्थ क्रिएशन हब

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी भारत को दुनिया के सबसे तेज़ी से संपत्ति निर्माण करने वाले देशों में गिना जा रहा है. टेक्नोलॉजी, फार्मा, वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों ने देश में नई आर्थिक ऊर्जा पैदा की है. हालांकि, संसद में पेश किए गए आंकड़े केवल 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले करदाताओं से जुड़े हैं. वहीं अरबपतियों की सूची तैयार करने वाली निजी संस्थाएं संपत्ति के अलग-अलग मानकों का उपयोग करती हैं.

क्या बढ़ती अमीरी के साथ बढ़ रही है असमानता?

जहां एक ओर देश में वेल्थ क्रिएशन की गति तेज हुई है, वहीं आर्थिक असमानता पर बहस भी लगातार गहराती जा रही है. कई आर्थिक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि देश की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा अब भी सीमित आबादी के पास केंद्रित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक विकास के साथ रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और आय के अवसर भी समान रूप से बढ़ते हैं तो इसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सकता है. लेकिन यदि संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रहती है तो आय असमानता की चुनौती और गंभीर हो सकती है.

किन राज्यों में सबसे तेजी से बढ़ रहे धनाढ्य लोग?

देश में महाराष्ट्र, दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना ऐसे राज्य हैं जहां हाई नेटवर्थ व्यक्तियों की संख्या सबसे अधिक तेजी से बढ़ रही है. मुंबई आज भी देश की वित्तीय राजधानी होने के कारण सबसे बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों का केंद्र बनी हुई है. वहीं बेंगलुरु स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी सेक्टर की वजह से नए करोड़पतियों और उच्च आय वर्ग के लोगों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है.

आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है 100 करोड़ क्लब

यदि भारत आने वाले वर्षों में 6 से 7 प्रतिशत या उससे अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखता है, विदेशी निवेश में निरंतर वृद्धि होती है और पूंजी बाजार मजबूत रहता है, तो 100 करोड़ रुपये से अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम के चलते यह आंकड़ा आने वाले वर्षों में 600 के पार भी जा सकता है.

केवल अमीरों की संख्या नहीं, बदलती अर्थव्यवस्था का संकेत

100 करोड़ रुपये से अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की बढ़ती संख्या केवल कुछ लोगों की बढ़ती संपत्ति की कहानी नहीं है. यह भारत की आर्थिक संरचना में हो रहे बड़े बदलावों का संकेत भी है. निवेश बढ़ रहा है, नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, डिजिटल कारोबार का दायरा फैल रहा है और टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी बन रही है.

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