नई दिल्ली: सिंधु घाटी सभ्यता, जो अपने शानदार शहरों जैसे हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और राखीगढ़ी के लिए जानी जाती है, एक समय में संसार की सबसे समृद्ध और प्राचीन सभ्यताओं में से एक थी. फिर, यह अचानक या धीरे-धीरे गायब हो गई. इसके पीछे का राज अब IIT गांधीनगर के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि इस सभ्यता के विलुप्त होने का मुख्य कारण लंबे समय तक चलने वाला सूखा था.
सूखा और उसकी कड़ी असरें
सिंधु घाटी सभ्यता की संपन्नता और अस्तित्व पूरी तरह से सिंधु नदी पर निर्भर थे. यह नदी न केवल पानी की आपूर्ति करती थी, बल्कि कृषि, व्यापार और जीवन की अन्य आवश्यकताओं के लिए भी महत्वपूर्ण थी. लेकिन रिसर्च के मुताबिक, समय के साथ इस क्षेत्र में बारिश की मात्रा 10-20% तक घटने लगी और तापमान में लगभग 0.5°C का इजाफा हुआ. सबसे गंभीर रूप से, 4450 से 3400 साल पहले के बीच चार बड़े सूखे पड़े, जिनमें से एक सूखा लगभग 164 साल तक चला. इस सूखे ने सभ्यता के 91% हिस्से को प्रभावित किया.
जलवायु परिवर्तन और खेती का बदलाव
प्रारंभ में लोग ऐसे इलाकों में बसे थे जहां वर्षा अधिक होती थी, लेकिन जैसे-जैसे पानी की कमी बढ़ी, लोग सिंधु नदी के आसपास रहने लगे. लेकिन लंबे सूखे के कारण नदी के पानी का प्रवाह भी कम हुआ. इस बदलते परिदृश्य में, वैज्ञानिकों ने पाया कि किसान पहले की फसलों जैसे गेहूं और जौ को छोड़कर अब बाजरा जैसी सूखा सहनशील फसलें उगाने लगे. बावजूद इसके, सूखा लगातार बढ़ता गया और खेती प्रभावित होने लगी.
जल स्रोतों की कमी और सभ्यता का विघटन
गुफाओं और झीलों के नमूनों से यह स्पष्ट हुआ कि पानी के स्रोत तेजी से घट रहे थे. इसके परिणामस्वरूप, सबसे बड़ा सूखा, जो 100 साल तक चला, सभ्यता के अंत का कारण बना. इस दौरान बड़े शहरों के खाली होने की प्रक्रिया शुरू हुई, और लोग छोटे-छोटे गांवों में फैल गए. यही वह समय था जब इस महान सभ्यता का विघटन हुआ.
वैश्विक जलवायु बदलावों का प्रभाव
अधिकारियों का कहना है कि केवल स्थानीय सूखा ही नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु बदलाव, जैसे एल-नीनो और उत्तरी अटलांटिक में ठंडे होने की प्रक्रिया ने भी भारतीय मानसून को कमजोर किया. समुंदर के तापमान में वृद्धि ने जमीन और समुद्र के तापमान में भिन्नता को कम कर दिया, जिसके कारण मानसून की बारिश घटने लगी. परिणामस्वरूप, सूखा और अधिक गहरा हो गया.
धीरे-धीरे विलीन हुई सभ्यता
पहले माना जाता था कि सिंधु घाटी सभ्यता अचानक खत्म हो गई, लेकिन नई रिसर्च यह सिद्ध करती है कि यह एक लंबी और धीमी प्रक्रिया थी. लोग पानी की कमी से मुकाबला करने के लिए जगह बदलते रहे, खेती के तरीकों में परिवर्तन करते रहे, और छोटे-छोटे समूहों में बसते रहे. सभ्यता पूरी तरह खत्म नहीं हुई, बल्कि उसका रूप बदलता गया. बड़े शहरों का विघटन हुआ और वे छोटे समुदायों में बदल गए.
पानी की कमी से होने वाली समस्याएं
सिंधु घाटी सभ्यता का अंत आज के लिए एक बड़ा संकेत है. यह हमें यह बताता है कि किसी भी सभ्यता को पानी की कमी से संकट का सामना करना पड़ सकता है. जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी आज भी एक बड़ी चुनौती है, और इस शोध से यह साफ होता है कि भविष्य में बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग भारतीय मानसून को थोड़ा बेहतर कर सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हम पानी के प्रबंधन में कोई कोताही बरतें. जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन प्रबंधन के मामले में सही नीतियां और उपाय बहुत जरूरी हैं.
ये भी पढ़ें: CJI सूर्यकांत ने पद संभालते ही केस लिस्टिंग में कर दिया बड़ा बदलाव, इस दिन से बदल जाएंगे नियम