मोसाद ने 30 साल तक किया पीछा, जैसे ही मिला मौका... हिजबुल्लाह के मिलिट्री चीफ को इजरायल ने कैसे मारा?

इज़रायल और हिज़बुल्लाह के बीच दशकों से चले आ रहे टकराव में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब इज़रायली खुफिया एजेंसियों ने हिज़बुल्लाह के सैन्य ढांचे के सबसे अहम चेहरे हेथम अली तबातबाई को लेबनान में एक गुप्त ऑपरेशन में मार गिराया.

How Israels Mossad killed Hezbollahs military chief
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तेल अवीव: इज़रायल और हिज़बुल्लाह के बीच दशकों से चले आ रहे टकराव में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब इज़रायली खुफिया एजेंसियों ने हिज़बुल्लाह के सैन्य ढांचे के सबसे अहम चेहरे हेथम अली तबातबाई को लेबनान में एक गुप्त ऑपरेशन में मार गिराया.

तबातबाई पिछले तीन दशकों से इज़रायल की हिट-लिस्ट में नंबर एक पर रहा था. कई बार पीछा किया गया, कई बार ट्रैक मिला, लेकिन वह हर बार ओझल हो जाता था. लेकिन जब हिज़बुल्लाह की शीर्ष कमान पिछले वर्ष की कार्रवाई में कमजोर हुई, तब वह छिपने से बाहर आने को मजबूर हुआ और यही उसकी आखिरी गलती साबित हुई.

कौन था हेथम अली तबातबाई?

लेबनान में हिज़बुल्लाह के पुनर्गठन की पूरी जिम्मेदारी तबातबाई पर थी. इज़रायली सैन्य खुफिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इज़रायली मीडिया को बताया कि तबातबाई न केवल हिज़बुल्लाह का “सबसे प्रभावशाली बचा हुआ कमांडर” था, बल्कि वह युद्धविराम के बाद संगठन को दोबारा खड़ा करने की सबसे बड़ी कोशिश की अगुवाई कर रहा था.

वह ईरान के साथ मिलकर—

  • नए हथियारों की आपूर्ति,
  • सैन्य क्षमताओं का विस्तार,
  • और संगठन की रचना में बड़े बदलाव

जैसे कामों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था.

अधिकारी के अनुसार, तबातबाई की भूमिका इतनी अहम थी कि वह हिज़बुल्लाह के कमांड स्ट्रक्चर का “स्तंभ” बन चुका था.

कौन-कौन सी यूनिट्स संभालता था तबातबाई?

तबातबाई का महत्व सिर्फ रणनीतिक स्तर पर नहीं था. वह हिज़बुल्लाह की एलिट रदवान यूनिट का संचालन करता था. यह वही यूनिट है, जिसे इज़रायल पर बड़े पैमाने पर हमलों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.

इसके अलावा वह ईरान, सीरिया, इराक और यमन में फैले “एक्सिस नेटवर्क” से जुड़े हिज़बुल्लाह के विभिन्न संपर्क तंत्रों का भी कमांडर था. इस नेटवर्क को ईरान का प्रमुख क्षेत्रीय तंत्र माना जाता है, जो पूरे क्षेत्र में हथियारों, प्रशिक्षण और जानकारी का आदान-प्रदान सम्भालता है.

जब उसे संगठन का चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया, तभी तय हो गया कि वह इज़रायल का “टॉप-प्रायोरिटी टारगेट” बनने वाला है.

इज़रायल से 30 साल तक कैसे बचता रहा तबातबाई?

इज़रायली खुफिया तबातबाई पर लंबे समय से नजर रख रही थी. वह सतर्क, बेहद चतुर और हर कदम सोच-समझकर रखने वाला कमांडर माना जाता था.

इज़रायल के अनुसार—

  • वह अपने ठिकाने बार-बार बदलता था
  • डिजिटल संचार से बचता था
  • सिर्फ भरोसेमंद लोगों से मिलता था
  • और लगातार भूमिगत नेटवर्क का उपयोग करता था

इसी वजह से वह कई वर्षों तक किसी भी सटीक हमले से बचता रहा.

लेकिन पिछले वर्ष जब हिज़बुल्लाह की टॉप ब्रास पर कई हमले हुए और उनकी क्षमता कमजोर हुई, तबातबाई को संगठन की कमान संभालने के लिए बाहर निकलना पड़ा. इज़रायल के लिए यही वह खिड़की थी, जिसका इंतजार तीन दशक से किया जा रहा था.

आखिर किस तरह मिला इज़रायल को अवसर?

सूत्रों के अनुसार, युद्धविराम के बाद हिज़बुल्लाह की नई सैन्य तैयारियों ने इज़रायल के लिए खतरा बढ़ा दिया था. तबातबाई को कई अहम बैठकों और निरीक्षण दौरों पर जाना पड़ रहा था.

उसी दौरान इज़रायल को उसके स्थान और मूवमेंट की सटीक इंटेलिजेंस मिली. इज़रायली सेना ने इस जानकारी की पुष्टि कई स्रोतों तकनीकी, मानव और सैटेलाइट से की.

इसके बाद एक विशेष ऑपरेशन का प्लान बनाया गया, जिसे मिनट-टू-मिनट पर्फेक्शन के साथ अंजाम दिया गया. हमले के दौरान तबातबाई अपने सुरक्षा घेरों के बावजूद बच नहीं पाया.

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