Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज पर इन रंगों के कपड़े पहनकर करें श्रृंगार, बरसेगा सौभाग्य और खुशियां

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज पर हरे रंग को सबसे खास माना जाता है, जबकि लाल और पीला रंग भी शुभ माने जाते हैं. जानें तीज के दिन किन रंगों के कपड़े और चूड़ियां पहनना अच्छा माना जाता है और किन रंगों से दूरी बनाने की परंपरा है.

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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज का पर्व सावन की खूबसूरती, सुहाग की परंपराओं और भगवान शिव-माता पार्वती की भक्ति का अनोखा संगम है. इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, पूजा-अर्चना करती हैं और सोलह श्रृंगार के साथ त्योहार की खुशियां मनाती हैं. तीज के मौके पर कपड़ों और चूड़ियों के रंग को लेकर भी कई धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं. खासतौर पर हरे रंग को इस पर्व का प्रमुख रंग माना जाता है.

साल 2026 में हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त, शनिवार को रखा जाएगा. ऐसे में अगर आप भी इस दिन के लिए अपना पारंपरिक लुक तैयार कर रही हैं, तो जानिए किन रंगों को शुभ माना जाता है और किन रंगों से दूरी बनाने की परंपरा है.

हरियाली तीज पर हरे रंग का क्यों है खास महत्व?

हरियाली तीज के नाम में ही इस पर्व का सबसे खास रंग छिपा हुआ है. सावन के महीने में जब प्रकृति चारों ओर हरियाली से भर जाती है, उसी प्राकृतिक सौंदर्य के बीच तीज का उत्सव मनाया जाता है. इसलिए हरा रंग इस त्योहार से गहराई से जुड़ा हुआ है.

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में हरे रंग को सुख, समृद्धि, सौभाग्य और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि इस दिन महिलाएं हरी साड़ी, लहंगा, सूट या अन्य पारंपरिक परिधान पहनना पसंद करती हैं. हरी कांच की चूड़ियां भी तीज के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं.

हालांकि किसी विशेष रंग को पहनना धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं है. रंगों का महत्व मुख्य रूप से परंपरा, संस्कृति और व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा हुआ है.

लाल रंग भी तीज के लिए माना जाता है शुभ

हरे रंग के अलावा लाल रंग को भी हरियाली तीज पर शुभ माना जाता है. भारतीय संस्कृति में लाल रंग को प्रेम, सौभाग्य, शक्ति और सुहाग का प्रतीक माना गया है. यही कारण है कि शादीशुदा महिलाएं तीज जैसे पर्वों पर लाल साड़ी, चुनरी या अन्य लाल रंग के परिधान पहनना पसंद करती हैं.

लाल चूड़ियां और लाल चुनरी भी पारंपरिक तीज लुक को आकर्षक बना सकती हैं. अगर किसी महिला के पास हरे रंग का परिधान नहीं है या वह हरा रंग पहनना पसंद नहीं करती, तो लाल रंग एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

पीले रंग से भी सजा सकती हैं तीज का श्रृंगार

हरियाली तीज पर पीले रंग को भी सकारात्मक और शुभ माना जाता है. भारतीय परंपराओं में पीले रंग को ऊर्जा, पवित्रता और ज्ञान से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में पीली साड़ी, सूट, लहंगा या चुनरी पहनकर भी तीज के दिन पारंपरिक लुक अपनाया जा सकता है.

हरे और लाल रंग के साथ पीले रंग को चूड़ियों, दुपट्टे या अन्य श्रृंगार में शामिल किया जा सकता है. सबसे खास बात यह है कि तीज के दिन रंगों का चुनाव महिला अपनी पसंद और परिवार की परंपराओं के अनुसार कर सकती है.

हरियाली तीज पर काले रंग से क्यों बचते हैं?

हरियाली तीज के मौके पर कुछ रंगों को लेकर ऐसी पारंपरिक मान्यताएं भी हैं, जिनके कारण महिलाएं उनसे दूरी बनाती हैं. इनमें सबसे प्रमुख काला रंग है. भारतीय लोक और धार्मिक परंपराओं में काले रंग को कई शुभ अवसरों पर पहनने से बचने की सलाह दी जाती रही है.

इसी वजह से तीज के दिन महिलाएं आमतौर पर काले रंग की साड़ी, सूट, चूड़ियां या अन्य कपड़े पहनने से बचती हैं. हालांकि यह किसी सार्वभौमिक धार्मिक नियम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में मान्यताएं अलग हो सकती हैं.

क्या तीज पर सफेद रंग पहनना चाहिए?

सफेद रंग को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं. कुछ मान्यताओं में सुहाग और मांगलिक अवसरों पर सफेद रंग को प्राथमिकता नहीं दी जाती. इसलिए कई महिलाएं हरियाली तीज के दिन सफेद रंग से दूरी बनाना पसंद करती हैं.

लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में पर्व मनाने की परंपराएं अलग हैं. इसलिए सफेद रंग को लेकर किसी एक मान्यता को सभी पर लागू करना उचित नहीं होगा. तीज के दिन श्रद्धा, पूजा और पारिवारिक परंपराओं को अधिक महत्व दिया जाता है.

तीज पर हरी चूड़ियों की खनक क्यों खास?

हरियाली तीज के श्रृंगार में हरी चूड़ियों की अपनी अलग पहचान है. हरी कांच की चूड़ियां सावन की हरियाली और सुहाग की पारंपरिक भावना से जुड़ी मानी जाती हैं. महिलाएं इन्हें साड़ी या लहंगे के साथ पहनकर अपने तीज लुक को खास बना सकती हैं.

कई जगहों पर हरी चूड़ियों के साथ लाल या पीली चूड़ियां भी पहनी जाती हैं. मेहंदी, बिंदी, सिंदूर और पारंपरिक आभूषणों के साथ हरी चूड़ियां सोलह श्रृंगार का हिस्सा बनकर तीज के उत्सव को और खूबसूरत बना देती हैं.

रंगों से ज्यादा जरूरी है पूजा में श्रद्धा

हरियाली तीज पर शुभ रंगों और श्रृंगार की अपनी सांस्कृतिक खूबसूरती है, लेकिन पर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा है. अगर किसी महिला के पास हरे, लाल या पीले रंग के कपड़े नहीं हैं, तो इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.

साफ-सुथरे और अपनी पसंद के वस्त्र पहनकर भी पूरे मन से पूजा की जा सकती है. किसी पर्व की धार्मिक भावना केवल कपड़ों के रंग पर निर्भर नहीं होती. आस्था, विश्वास और पूजा का भाव ही इस त्योहार की वास्तविक आत्मा है.

Hariyali Teej 2026 पर कैसे तैयार करें पारंपरिक लुक?

अगर आप 15 अगस्त को हरियाली तीज के लिए पारंपरिक लुक अपनाना चाहती हैं, तो हरी साड़ी या लहंगे के साथ हरी कांच की चूड़ियां एक खूबसूरत विकल्प हो सकती हैं. इसमें लाल या पीले रंग का हल्का संयोजन आपके लुक को और आकर्षक बना सकता है.

मेहंदी, सिंदूर, बिंदी और पारंपरिक आभूषणों के साथ सोलह श्रृंगार पूरा किया जा सकता है. सावन की हरियाली और तीज की परंपराओं से जुड़ा यह लुक त्योहार की रौनक को और बढ़ा देगा.

आखिरकार हरियाली तीज केवल रंगों और श्रृंगार का पर्व नहीं है. यह भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था, वैवाहिक सुख की कामना और सावन की प्राकृतिक सुंदरता से जुड़ा उत्सव है. इसलिए शुभ रंगों की मान्यताओं को परंपरा के रूप में अपनाएं, लेकिन पूजा में श्रद्धा और मन की शुद्धता को सबसे अधिक महत्व दें.

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