यूरोप में सुरक्षा माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है. जर्मनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए किसी भी तरह के समझौते में रुचि नहीं दिखा रहा है. जर्मनी का दावा है कि रूसी नेतृत्व की हालिया टिप्पणियों और कदमों से यह साफ झलकता है कि युद्ध समाप्ति की संभावना निकट भविष्य में नहीं दिखती.
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने संसद में संबोधन के दौरान कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने यूक्रेन के लिए एक नई शांति योजना तैयार की थी, लेकिन रूस की तरफ से इस पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला.
रूस किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं
उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयानों में कहीं भी यह संकेत नहीं मिलता कि वे युद्ध विराम या बातचीत के लिए तैयार हैं.
पिस्टोरियस ने कहा, “पुतिन का रवैया स्पष्ट करता है कि रूस किसी भी समझौते को स्वीकार करने को तैयार नहीं है.”
इसी आधार पर उन्होंने जर्मन संसद को सूचित किया कि सरकार आने वाले वर्षों में रक्षा खर्च बढ़ाएगी और यूक्रेन की सैन्य सहायता में भी इजाफा किया जाएगा.
नाटो देश पर हमला कर सकता है रूस: जर्मन विदेश मंत्री
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडफुल ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि रूस अगले चार वर्षों में किसी नाटो सदस्य देश पर हमला कर सकता है. यह बयान उन्होंने बर्लिन में आयोजित फॉरेन पॉलिसी फोरम में दिया.
वेडफुल के अनुसार, जर्मन खुफिया एजेंसियों ने रिपोर्ट दी है कि रूस ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं और वह 2029 तक नाटो के खिलाफ बड़े स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार हो सकता है.
उन्होंने कहा:
उनका कहना था कि रूस अपनी अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को भी युद्ध के अनुकूल बना रहा है, जिससे उसकी लंबी अवधि की सैन्य योजना स्पष्ट होती है.
शांति समझौते के बावजूद रूस खतरा बना रहेगा
नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने यूरोप की सुरक्षा पर गंभीर टिप्पणी की. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि यूक्रेन और रूस के बीच किसी तरह का शांति समझौता हो भी जाए, तब भी रूस यूरोप के लिए एक बड़ा खतरा बना रहेगा.
रुटे ने चेतावनी दी कि यूरोप का कोई देश यह भ्रम न पाले कि वह सुरक्षित है, क्योंकि रूसी मिसाइलें कुछ ही मिनटों में यूरोप के कई शहरों तक पहुंच सकती हैं.
उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों की सराहना भी की. उनका कहना था कि नया शांति प्रस्ताव बातचीत के लिए एक अच्छी नींव साबित हो सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ट्रम्प ने नाटो सदस्यों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का जो दबाव डाला था, वह पूरी तरह उचित था और यूरोपीय सुरक्षा के हित में भी.
रुटे ने विशेष रूप से स्पेन का नाम लेते हुए कहा कि आने वाले समय में उसे अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करनी चाहिए ताकि नाटो की सामूहिक सुरक्षा मजबूत हो.
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