फ्लाईदुबई की एक उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हुए हमले ने विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की जांच के मुताबिक, 29 वर्षीय ओमानी को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी कथित तौर पर इजराइल के तेल अवीव स्थित बेन गुरियन एयरपोर्ट पर विमान गिराने की योजना बना रहा था. जांचकर्ताओं को आशंका है कि वह 11 सितंबर 2001 के अमेरिका हमलों जैसी घटना को दोहराना चाहता था.
विमान में 170 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें अधिकांश इजराइली बताए गए हैं. आरोप है कि को-पायलट ने कुल्हाड़ी से कैप्टन पर हमला किया, लेकिन यात्रियों और विमान के अन्य पायलटों की मदद से स्थिति संभाली गई और विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया.
कट्टरपंथी विचारों से जुड़ने का दावा
UAE के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी के मुताबिक, आरोपी को-पायलट करीब एक दशक पहले ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित हुआ था. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हम्माम अल-हम्मामी ने 2015 से 2017 के बीच मेलबर्न स्थित रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RMIT) में पढ़ाई की, लेकिन इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी नहीं की.
जांचकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान वह आतंकी संगठनों और आत्मघाती हमलों का समर्थन करने वाली किताबों तथा ऑनलाइन सामग्री में दिलचस्पी लेने लगा था. उसके विचारों पर 9/11 हमलों और तकफीर विचारधारा के प्रभाव की भी जांच की गई, जिसमें कुछ लोग दूसरे मुसलमानों को धर्म से बाहर मानते हैं.
विमान उड़ाने की ट्रेनिंग के पीछे थी हमले की योजना?
जांच के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि विमान से हमला करने की उसकी योजना उसके पायलट बनने के फैसले से जुड़ी थी. उसने जनवरी 2026 में फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की थी. इससे पहले वह करीब चार साल ओमान एयर में काम कर चुका था और कुछ समय मोरक्को की रॉयल एयर मारोक से भी जुड़ा रहा. जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसने तेल अवीव के लिए दो उड़ानों के दौरान रास्ते और परिस्थितियों की जानकारी जुटाई थी.
उसके ऑनलाइन गतिविधियों और बॉक्सिंग सीखने की बात भी जांच में सामने आई. अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने दावा किया कि उसने इस योजना को अकेले तैयार किया था. हालांकि, इन दावों की पूरी पुष्टि और मामले के सभी पहलुओं को समझने के लिए जांच के निष्कर्ष अहम होंगे.
सुरक्षा जांच पास करने के बावजूद कैसे नहीं मिला सुराग?
UAE अधिकारियों के मुताबिक, फ्लाईदुबई में नौकरी मिलने से पहले आरोपी ने निर्धारित सुरक्षा जांच पास की थी और अच्छे आचरण से जुड़ा प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया था. इसके बावजूद जांचकर्ताओं का कहना है कि उसके कथित इरादों का पहले पता नहीं चल सका.
वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ओमान के अधिकारी पहले भी उसके कट्टरपंथी विचारों को लेकर जांच कर चुके थे. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि उसके विचारों को लेकर पहले से चिंताएं थीं, तो उनका असर विमानन क्षेत्र में उसकी नियुक्ति और सुरक्षा आकलन पर क्यों नहीं पड़ा. इस मामले ने पायलटों की पृष्ठभूमि की जांच, विभिन्न देशों के बीच सुरक्षा सूचनाओं के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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