इस्लामाबाद/बीजिंग: पाकिस्तान की नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था से परेशान चीन अब दूसरे रास्ते तलाश रहा है. बलूचिस्तान में चीनी नागरिकों पर लगातार हो रहे हमलों और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अफगानिस्तान ने वखान कॉरिडोर के रास्ते चीन की सीमा तक जाने वाली 121 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया है.
करीब 55 लाख डॉलर की लागत से बनी इस सड़क को अफगान इंजीनियरों ने तैयार किया है. इससे अफगानिस्तान को चीन तक पहुंचने का सीधा रास्ता मिल सकता है. अब तक चीन की क्षेत्रीय योजनाओं में पाकिस्तान और CPEC की अहम भूमिका रही है. लेकिन सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों के चलते बीजिंग दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहा है. इससे पाकिस्तान की रणनीतिक अहमियत पर असर पड़ सकता है.
चीनी नागरिकों पर हमलों से परेशान चीन
चीन की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि अफगानिस्तान और आसपास के इलाकों में अस्थिरता का असर उसके शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंच सकता है. बीजिंग को डर है कि उग्रवादी संगठन इन इलाकों का इस्तेमाल अपने ठिकाने बनाने और चीन के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए कर सकते हैं.
चीन को खास तौर पर तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी को लेकर चिंता है, जिसे पहले ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के नाम से जाना जाता था. चीनी अधिकारियों को आशंका है कि ऐसे संगठन अफगानिस्तान के असुरक्षित इलाकों का इस्तेमाल लोगों और सामान की आवाजाही, ट्रेनिंग और चीनी परियोजनाओं पर हमलों के लिए कर सकते हैं.
पाकिस्तान में भी चीनी नागरिकों पर कई बार हमले हो चुके हैं. इनमें चीन की विकास परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी और इंजीनियर भी निशाना बने हैं. इससे बीजिंग की चिंता बढ़ी है. चीन लगातार पाकिस्तान पर अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बना रहा है.
बलूचिस्तान में हालात ज्यादा गंभीर हैं. यहां बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे अलगाववादी संगठन चीनी नागरिकों और CPEC से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते रहे हैं. ऐसे में चीन को अपनी परियोजनाएं बनाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी अतिरिक्त पैसा और संसाधन खर्च करने पड़ रहे हैं.
चीन ने पाकिस्तान से दूरी क्यों बढ़ाई?
चीन की चिंता सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. पाकिस्तान के अमेरिका के साथ बढ़ते संबंध भी बीजिंग के लिए अहम मुद्दा हैं. फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच नजदीकी बढ़ी है. चीन को आशंका हो सकती है कि इससे क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव बढ़ेगा और उसके रणनीतिक हितों पर असर पड़ेगा.
बीजिंग के लिए यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. वह नहीं चाहता कि अमेरिका को ऐसे क्षेत्रों में ज्यादा पहुंच मिले, जिन्हें चीन अपनी पश्चिमी सुरक्षा सीमा का हिस्सा मानता है.
इसी वजह से चीन अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए दूसरे रास्तों पर भी विचार कर रहा है. वखान कॉरिडोर की नई सड़क इस दिशा में अहम हो सकती है. इसके जरिए चीन को पाकिस्तान और CPEC पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय संपर्क का एक और विकल्प मिल सकता है.
हालांकि, इस सड़क के खुलने का मतलब यह नहीं है कि चीन ने पाकिस्तान से पूरी तरह दूरी बना ली है. लेकिन इससे बीजिंग को व्यापार और संपर्क के नए रास्ते तलाशने में मदद मिल सकती है.
तालिबान के लिए भी खुलेंगे नए रास्ते
वखान कॉरिडोर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे उसे पाकिस्तान के रास्ते होने वाले व्यापार पर निर्भरता कम करने और चीन के साथ सीधे संपर्क बढ़ाने का मौका मिल सकता है.
अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क को बनाने में स्थानीय इंजीनियरों और कर्मचारियों की मदद ली गई. इससे अफगानिस्तान ने अपने स्तर पर रणनीतिक बुनियादी ढांचा तैयार करने की कोशिश की है.
चीन से सीधे संपर्क के जरिए अफगानिस्तान मशीनरी, सामान और दूसरे व्यापारिक अवसरों तक पहुंच बनाने की उम्मीद कर सकता है. इससे उसे क्षेत्रीय कारोबार में अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका मिल सकता है.
हालांकि, इस सड़क से पाकिस्तान की अहमियत पूरी तरह खत्म हो जाएगी, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी. अफगानिस्तान और चीन के बीच व्यापार बढ़ने के लिए सड़क की स्थिति, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी होंगी.
वखान कॉरिडोर भारत के लिए क्यों अहम है?
वखान कॉरिडोर का विकास भारत के लिए भी क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है. इससे अफगानिस्तान को चीन और मध्य एशिया के साथ संपर्क बढ़ाने का एक और रास्ता मिल सकता है. साथ ही, पाकिस्तान पर उसकी व्यापारिक निर्भरता कम करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं.
चीन के लिए यह रास्ता CPEC का एक संभावित विकल्प बन सकता है. CPEC का एक अहम हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, जिसे लेकर भारत लगातार विरोध जताता रहा है.
कुल मिलाकर, वखान कॉरिडोर की सड़क सिर्फ आवाजाही का नया रास्ता नहीं है. यह चीन और अफगानिस्तान के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है. पाकिस्तान में सुरक्षा संबंधी समस्याएं और बदलते अंतरराष्ट्रीय रिश्ते चीन को दूसरे विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस सड़क से व्यापार कितना बढ़ता है और इसका पाकिस्तान, चीन तथा अफगानिस्तान के संबंधों पर कितना असर पड़ता है.