पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू, इमरान खान की पार्टी की सरकार भंग, गृह युद्ध का खतरा?

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के लॉन्ग मार्च के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है. खैबर पख्तूनख्वा (KP) में इमरजेंसी और गवर्नर रूल लागू कर दिया गया है.

Emergency imposed in Pakistan Khyber Pakhtunkhwa Dismiss Imran Khan Govt
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Khyber Pakhtunkhwa Emergency: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के लॉन्ग मार्च के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है. खैबर पख्तूनख्वा (KP) में इमरजेंसी और गवर्नर रूल लागू कर दिया गया है. यह पाकिस्तान का इकलौता प्रांत था, जहां PTI की सरकार थी. इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की कुर्सी भी चली गई है.

रविवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दे दी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रांत की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा हालात पर चर्चा हुई थी. इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी लगाने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी गई. राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी.

इस बीच, एक संवेदनशील खुफिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खैबर पख्तूनख्वा पर केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश से बड़े पैमाने पर विरोध और हिंसा भड़क सकती है. इससे पाकिस्तान में सुरक्षा संकट और गहरा होने का खतरा है.

इमरजेंसी के खिलाफ एकजुट हो सकते हैं राजनीतिक दल

CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया आकलन में आशंका जताई गई है कि खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी या गवर्नर रूल लागू होने से कई राजनीतिक दल विरोध में उतर सकते हैं. इनमें PTI के अलावा जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-एफ (JUI-F), अवामी नेशनल पार्टी (ANP) और दूसरे पश्तून राष्ट्रवादी समूह शामिल हैं.

रिपोर्ट में प्रांत के लोगों के बीच सेना को लेकर बढ़ती नाराजगी का भी जिक्र किया गया है. दावा है कि स्थानीय पश्तूनों के बीच यह आरोप लगाया जा रहा है कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में रखने के पीछे हैं. ऐसे में केंद्र सरकार के इस फैसले से राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है.

आतंकी संगठन उठा सकते हैं हालात का फायदा

खुफिया रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि राजनीतिक अस्थिरता का फायदा आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) उठा सकता है. संगठन अपनी गतिविधियां बढ़ाकर लंबे समय तक संघर्ष की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक तंगी, बेरोजगारी, गरीबी और लगातार हो रहे आतंकी हमलों ने पहले ही प्रांत के हालात मुश्किल बना रखे हैं. सैन्य अभियानों, स्थानीय लोगों के विस्थापन और संसाधनों के बंटवारे को लेकर भी नाराजगी बढ़ने की बात कही गई है. ऐसे में राजनीतिक टकराव बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है.

इमरान खान के लॉन्ग मार्च के बीच बड़ा फैसला

खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब PTI का लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा है. पार्टी की प्रमुख मांग इमरान खान की रिहाई और उन्हें तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की है.

इस मार्च का नेतृत्व खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री रहे सोहेल अफरीदी कर रहे हैं. जब उन्होंने मार्च शुरू किया था, तब वह मुख्यमंत्री थे, लेकिन अब गवर्नर रूल लागू होने के बाद उनकी कुर्सी चली गई है.

दूसरी ओर, मार्च के रावलपिंडी पहुंचने से पहले वहां धारा 144 लागू कर दी गई है. खुफिया रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि प्रांत में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के खिलाफ शुरू हुआ विरोध दूसरे इलाकों, खासकर पंजाब तक फैल सकता है. हालांकि, हालात किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा.